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Murli Dhakad
hamse kya maan sammaan ki baatein rind
hamse kya maan sammaan ki baatein rind | हम सेे क्या मान सम्मान की बातें 'रिंद'
- Murli Dhakad
हम
सेे
क्या
मान
सम्मान
की
बातें
'रिंद'
हमने
शराब
के
लिए
किताबें
बेची
है
- Murli Dhakad
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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गरचे
अहल-ए-शराब
हैं
हम
लोग
ये
न
समझो
ख़राब
हैं
हम
लोग
Jigar Moradabadi
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अब
तो
उतनी
भी
मुयस्सर
नहीं
मय-ख़ाने
में
जितनी
हम
छोड़
दिया
करते
थे
पैमाने
में
Divakar Rahi
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शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
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Asrar Ul Haq Majaz
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खद्दर
पहन
के
बेच
रहा
था
शराब
वो
देखा
मुझे
तो
हाथ
में
झंडा
उठा
लिया
मैं
भी
कोई
गँवार
सिपाही
न
था
जनाब
मैंने
भी
जाम
फेंक
के
डंडा
उठा
लिया
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Paplu Lucknawi
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बला
की
ख़ूब-सूरत
वो
उसे
ही
देख
जीता
हूँ
मुझे
उसकी
ज़रूरत
है,
न
मैं
उसका
चहीता
हूँ
कभी
उसको
परेशानी
मिरे
सिगरेट
से
होती
थी
उसे
बोलो
अभी
कोई
कि
मैं
दारू
भी
पीता
हूँ
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Deepankar
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नमकीं
गोया
कबाब
हैं
फीके
शराब
के
बोसा
है
तुझ
लबाँ
का
मज़े-दार
चटपटा
Abroo Shah Mubarak
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शायद
शराब
पीके
तुम्हें
फ़ोन
मैं
करूँँ
बस
इसलिए
शराब
कभी
पी
नहीं
मैंने
Tanoj Dadhich
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फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल
न
पूछिए
'मजरूह'
शराब
एक
है
बदले
हुए
हैं
पैमाने
Majrooh Sultanpuri
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हम
सबको
इसी
हैरत
में
मर
जाना
है
कि
मरके
फिर
किधर
जाना
है
अच्छा
हो
गर
हो
बैचेनी
का
कोई
सबब
ये
क्या
कि
पता
ही
नहीं
क्या
पाना
है
मेरे
पास
रखे
हैं
बहुत
से
काग़ज़
के
फूल
क्या
तुम्हारी
नजर
में
कोई
बुतखाना
है
एक
तो
गिला
न
कर
सका
बारिशों
का
और
उस
पर
शौक
तो
ये
है
कि
नहाना
है
क्या
कभी
शाम
की
आँखों
में
तुमने
डूबते
सूरज
के
दर्द
को
पहचाना
है
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Murli Dhakad
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जीना
कहते
हैं
जिसे
है
तमाशा
करना
जैसे
नशे
में
हो
फिर
से
नशा
करना
Murli Dhakad
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दिल
दुखाने
को
आए
हो
तुम
फिर
रुलाने
को
आए
हो
तुम
क्या
नए
किस्म
का
कुछ
सितम
आज़माने
को
आए
हो
तुम
चिट्ठियाँ
लाए
हो
या
परन्द
आबोदाने
को
आए
हो
तुम
पास
आओगे
या
दूरियां
और
बढ़ाने
को
आए
हो
तुम
जलने
दो
मेरे
दिल
का
चराग़
क्यूँ
बुझाने
को
आए
हो
तुम
दिल
में
है
एक
अजब
सी
लहर
कि
बुलाने
को
आए
हो
तुम
हम
जैसे
फ़क़ीरों
के
पास
क्या
चुराने
को
आए
हो
तुम
ये
न
कहना
कि
इस
बार
तो
कुछ
गंवाने
को
आए
हो
तुम
मान
लूँ
मैं
कि
मजबूर
हो
तुम
क्या
हंसाने
को
आए
हो
तुम
रेत
पर
जो
लिखा
ही
नहीं
वो
मिटाने
को
आए
हो
तुम
तुमको
है
कुछ
ख़बर
कुछ
हिसाब
एक
जमाने
को
आए
हो
तुम
मुझको
शक
है
बहारों
का
गीत
गुनगुनाने
को
आए
हो
तुम
महके
महके
इशारों
से
क्या
घर
गिराने
को
आए
हो
तुम
अब
समुंदर
में
घर
है
मेरा
क्या
डूबाने
को
आए
हो
तुम
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Murli Dhakad
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सुंदर
कोयल
सुंदर
कागा
सुंदर
मृग
के
नैन
भागे
'रिंद'
दौड़ता
जाए
दिवस
दिखे
ना
रैन
Murli Dhakad
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जितना
गुमान
से
ज़ुल्फ़ों
को
सँवारा
गया
उतना
इमान
से
ये
बेसहारा
गया
आपके
हाथ
में
पत्थर
क्यूँ
नहीं
है
आपकी
तरफ़
भी
तो
इशारा
गया
आपको
तो
सौ
ख़ून
माफ
थे
आपसे
ये
बेचारा
न
मारा
गया
आदमी
जंगल
में
था
तो
ठीक
था
शहर
में
बसा
कि
मारा
गया
लहू
लहू
में
फर्क
नहीं
है
आपके
क़त्ल
पे
मैं
भी
मारा
गया
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Murli Dhakad
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