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Murli Dhakad
ye kaisa tajurba hai ki dil jalane pe akshar
ye kaisa tajurba hai ki dil jalane pe akshar | ये कैसा तजुर्बा है कि दिल जलाने पे अक्सर
- Murli Dhakad
ये
कैसा
तजुर्बा
है
कि
दिल
जलाने
पे
अक्सर
अँधेरा
छा
जाता
है
रोशनी
नहीं
होती
- Murli Dhakad
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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क्या
ख़ूब
तुम
ने
ग़ैर
को
बोसा
नहीं
दिया
बस
चुप
रहो
हमारे
भी
मुँह
में
ज़बान
है
Mirza Ghalib
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उसने
हम
सेे
बातें
करना
छोड़
दिया
माँ
की
जिस
सेे
बात
कराने
वाले
थे
Tanoj Dadhich
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यार
उसके
क़ीमती
तोहफ़े
तो
लाए
थे
बहुत
मैं
बरेली
का
था
मैंने
ला
के
झुमका
दे
दिया
Rudransh Trigunayat
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कितनी
उजलत
में
मिटा
डाला
गया
आग
में
सब
कुछ
जला
डाला
गया
Manish Shukla
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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दिल
की
ख़ातिर
एक
रिश्ते
को
बचाने
के
लिए
आग
मैंने
ही
लगा
ली
ख़ुद
मिरे
घरबार
में
Shashank Shekhar Pathak
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कोई
दवा
न
दे
सके
मशवरा-ए-दुआ
दिया
चारागरों
ने
और
भी
दर्द
दिल
का
बढ़ा
दिया
Hafeez Jalandhari
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तुमको
हिचकी
लेने
से
भी
दिक़्क़त
थी
मैंने
तुमको
याद
ही
करना
छोड़
दिया
Mehshar Afridi
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किताबें
ख़ूब-सूरत
है,
चेहरे
स्याह
है
शायद
इसीलिए
ये
दुनिया
तबाह
है
Murli Dhakad
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आईने
के
दोनों
तरफ़
मुजरिम
खड़ा
है
और
लोग
हैं
कि
आईने
को
गुनहगार
बताते
हैं
Murli Dhakad
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साकिया
तेरे
इस
जहाँ
में
क्या
मिलेगा
बहुत
ढूंढूंगा
तो
ख़ुदा
मिलेगा
Murli Dhakad
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शिखर
पे
चढ़के
बैठे
थे
एहतियात
के
मौसम
सभी
गुजर
गए
बरसात
के
हम
रोशनी
के
तलबगार
लोग
हैं
हम
मुसाफिर
हैं
स्याह
रात
के
नहीं
काँटो
को
भी
ये
मंजूर
फूल
कोई
तोड़ा
जाए
बिना
बात
के
देखिए
महरूम
होते
चले
गए
हैं
मेरे
दोस्त
सभी
मेरी
ज़ात
के
नहीं
है
ग़म-ए-हयात
से
ये
ज़ख़्म
ये
ज़ख़्म
है
ख़ुद
अपने
जज़्बात
के
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Murli Dhakad
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जाम
कहने
सुनने
को
कहानी
रह
गया
है
और
पीने
को
बस
पानी
रह
गया
है
Murli Dhakad
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