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Murli Dhakad
saakiya tere is jahaan men kya milega
saakiya tere is jahaan men kya milega | साकिया तेरे इस जहाँ में क्या मिलेगा
- Murli Dhakad
साकिया
तेरे
इस
जहाँ
में
क्या
मिलेगा
बहुत
ढूंढूंगा
तो
ख़ुदा
मिलेगा
- Murli Dhakad
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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हम
नहीं
वो
जो
करें
ख़ून
का
दावा
तुझ
पर
बल्कि
पूछेगा
ख़ुदा
भी
तो
मुकर
जाएँगे
Sheikh Ibrahim Zauq
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ख़ुदा
ने
फ़न
दिया
हमको
कि
लड़के
इश्क़
लिखेंगे
ख़ुदा
कब
जानता
था
हम,
ग़ज़ल
में
दर्द
भर
देंगे
Prashant Sharma Daraz
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थे
ख़ुदा
को
मानने
वाले
बड़ी
तादाद
में
है
तअज्जुब
पर
ख़ुदा
की
मानता
कोई
न
था
Rao Nasir
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कितनी
सराहत
से
ख़ुदा
ने
की
तिरी
कारीगरी
शफ़्फ़ाफ़
शीशे
को
तराशा,
हूर
का
पैकर
दिया
Aditya Pandey
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ऐ
आसमान
तेरे
ख़ुदा
का
नहीं
है
ख़ौफ़
डरते
हैं
ऐ
ज़मीन
तेरे
आदमी
से
हम
Unknown
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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आसमाँ
में
है
ख़ुदा,
क्या
सब
दुआएंँ
आसमाँ
तक
जा
रही
हैं
मेरी
इक
फ़रयाद
पूरी
हो
तो
मैं
मानूँ
वहाँ
तक
जा
रही
हैं
Saahir
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बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
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वक़्त
ए
इफ़्तार
ख़ुद
रब
था
मेरे
क़रीब
तुझ
से
बढ़
कर
मगर
कुछ
न
माँगा
गया
Afzal Ali Afzal
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बज़्म-ए-जानाँ
की
रंगत
कुछ
खास
है
लेकिन
आज
रिन्द
की
तबियत
उदास
है
कितनी
आसान
है
आदमी
की
शक्ल
पढ़ता
हूँ
कि
हर
चेहरा
उदास
है
हम
नाचते
गाते
हुए
आते
थे
कभी
आज
स्कूल
से
आते
हुए
बच्चे
उदास
है
फूलों
के
चाहनेवाले
के
शौक
को
देख
मुस्कुराती
हुई
हर
कली
उदास
है
नए
ख़्वाब
की
ता'बीर
हो
चुकी
है
आँखों
में
पुरानी
एक
तस्वीर
उदास
है
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Murli Dhakad
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तुम्हारी
आँखों
से
मैं
ख़ूब-सूरत
हूँ
वरना
चाँद
की
अपनी
कोई
रोशनी
नहीं
होती
Murli Dhakad
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बताता
हूँ
राह
राहगीरों
को
अब
राह
में
ही
कहीं
खो
गया
हूँ
मैं
मेरे
हाथ
पे
किसी
ने
गुलाब
क्या
रखा
ख़ुशबू
ख़ुशबू
हो
गया
हूँ
मैं
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Murli Dhakad
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मेरी
उँगलियों
में
पड़
गई
है
गिरहें
तेरे
गेसुओं
की
आजकल
किसी
भी
बात
पर
अकड़
जाती
है
Murli Dhakad
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हम
सबको
इसी
हैरत
में
मर
जाना
है
कि
मरके
फिर
किधर
जाना
है
अच्छा
हो
गर
हो
बैचेनी
का
कोई
सबब
ये
क्या
कि
पता
ही
नहीं
क्या
पाना
है
मेरे
पास
रखे
हैं
बहुत
से
काग़ज़
के
फूल
क्या
तुम्हारी
नजर
में
कोई
बुतखाना
है
एक
तो
गिला
न
कर
सका
बारिशों
का
और
उस
पर
शौक
तो
ये
है
कि
नहाना
है
क्या
कभी
शाम
की
आँखों
में
तुमने
डूबते
सूरज
के
दर्द
को
पहचाना
है
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Murli Dhakad
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