लबोंकोसीकेहरदमपीताहूँख़ून-ए-जिगरअपना
दर-ओ-दीवारसेअबफोड़ताहूँयारोसरअपना
किसेमुजरिमकहूँकिसकोसज़ादूँऐदिल-ए-मुंसिफ़
ख़ुदअपनेहाथोंसेमैंनेजलायाहैयेघरअपना
अभीइनकहकशाओंसेबहुतआगेगुज़रनाहै
यूँँहीचलतारहेबसशबकेऐतारोसफ़रअपना
यूँँदर्द-ए-दिलसुनानेकोफ़सानेहैंबहुतलेकिन
उसेफ़ुर्सतकहाँरखनाहैक़िस्सामुख़्तसरअपना
किसीसेक्यागिलारक्खेंकिसीसेक्याशिकायतहो
जिसेआनाहोआजाएँखुलारहताहैदरअपना
कोईउम्मीदक्यारक्खेंइलाज-ए-दर्द-ए-उल्फ़तकी
किख़ुदभीइसमरज़मेंमुब्तलाहैचारा-गरअपना
गुज़रतेवक़्तकीधुननेभीधुँधलाएनहींमंज़र
हराहोतारहापलपलवोयादोंकाशजरअपना
मैंशीशाहूँसुनाहैतूभीशीशोंकामसीहाहै
लोआयाटूटकेमैंअबदिखादेतूहुनरअपना