ajab ik hashr barpa hai mujh | अजब इक हश्र बरपा है मुझ

  - MIR SHAHRYAAR
अजबइकहश्रबरपाहैमुझ
में
रोज़इकशख़्समरताहैमुझ
में
अपनीपरवाहक्यूँकरूँँआख़िर
वोथाहीकबजोमेराहैमुझ
में
अबकहींकुछधुआँनहींउठता
क्याख़बरकौनजलताहैमुझ
में
मेराभीजीबहलताहैउसीसे
अबभलाक्याअनोखाहैमुझ
में
मुझकोइकलम्हाभीक़रारनहीं
जानेअबकौनटूटाहैमुझ
में
ढूँढताहूँतेरावजूदमगर
अपनाहीआपबिखराहैमुझ
में
आगकाएकदरियाहैवोऔर
आगकादरियाबहताहैमुझ
में
मेरीसाँसोंज़रापतातोकरो
मुझीसेकौनलड़ताहैमुझ
में
बुझनहींसकताएकजामसेमैं
प्यासकाजलतासहराहैमुझ
में
मैंकिसीदुनियामेंनहींहूँमगर
सचयेहैसारीदुनियाहैमुझ
में
इसभरीबज़्ममेंभीचैननहीं
कोईतोहैजोतन्हाहैमुझ
में
  - MIR SHAHRYAAR
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