उसे है ऐसी वैसी बात का दुख

  - MIR SHAHRYAAR
उसेहैऐसीवैसीबातकादुख
मगरमुझकोहैअपनीज़ातकादुख
जहाँभीजाताहूँबसघेरताहै
वहीगुज़रेहुएलम्हातकादुख
कईहंगामोंसेगुज़रामैंलेकिन
नहींदिलसेगयाउसरातकादुख
शफ़क़-ज़ादीतुझेकैसेबताऊँ
बिछड़जानेकीपहलीरातकादुख
दिल-ओ-जाँहारनेआएथेहमही
किसेथामिरीजाँमातकादुख
जहाँमेंख़ुदसेबाहरकौननिकला
कोईसमझाकहाँसुक़रातकादुख
इसीदुखसेतोमैंज़िंदाहूँअबतक
बहुतप्याराहैअपनीज़ातकादुख
कमइसदश्त-ए-मुहब्बतमेंकिसीतौर
नहींहोतादिल-ए-बद-ज़ातकादुख
ख़ुदाओंकेजहाँमेंकौनसमझा
सितम-पर्वर्दाआदमज़ातकादुख
  - MIR SHAHRYAAR
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