हम थे होने की वारदात में क्या

  - MIR SHAHRYAAR
हमथेहोनेकीवारदातमेंक्या
गुलयहीखिलनेथेहयातमेंक्या
जबखिलाथामेरेवजूदकाफूल
तोउसीदमथाकायनातमेंक्या
जितनेसहराथेसबगुज़रगएहैं
अभीभीकुछहैदश्त-ए-ज़ातमेंक्या
तेरेजानेकेबादसोचताहूँ
बचगयाहैतसव्वुरातमेंक्या
एकपागलनेख़ुदकोखोदियाहै
इकतमन्ना-ए-इल्तिफ़ातमेंक्या
अपनीहीधुनमेंदिलयूँँशाम-ओ-सहर
ढूँढ़ताहैतवह्हुमातमेंक्या
मैंजहाँमेंकहींनहींमौजूद
मेराहोनाथामुम्किनातमेंक्या
हैअभीतकवोकर्बलाब-जुनूँ
तिश्नगीहैअभीफ़ुरातमेंक्या
कोईआवाज़तकनहींआती
हश्रहैबरपाइससुकातमेंक्या
सबाहमकोयेबताइयोतो
जागेहैंवोभीचाँदरातमेंक्या
अबभीहैडलमेंप्यारकामौसम
अबभीखिलतेहैंगुलनिशातमेंक्या
राहत-ए-जाँसुकून-ए-दिलअभीतक
ढूँढ़ताहैतअल्लुक़ातमेंक्या
वोशुआओंकाजोमुसाफ़िरथा
खोगयाहैअँधेरीरातमेंक्या
रातक्यूँँदुनियामुझकोअच्छीलगी
हाथतेराथामेरेहाथमेंक्या
उनमोहब्बतकीवादियोंकीतरफ़
हमयूँँहीचलरहेथेसाथमेंक्या
कितनाख़ालीहूँसोचताहूँमैं
बसयहीतीरगीहैज़ातमेंक्या
इकसवालीथाख़्वाबकारसिया
कुछमिलाथाउसेभीरातमेंक्या
  - MIR SHAHRYAAR
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy