न बदलो बस्ती अभी तुम्हारा ज़माना रस्ता बदल रहा है

  - Wasif Iqbal
बदलोबस्तीअभीतुम्हाराज़मानारस्ताबदलरहाहै
ठिकानाढूँढोगीतुमकहाँपरनगरतोसाराहीजलरहाहै
येसर्दरातोंमेंफ़र्शजैसेसफ़ेदचादरसेढकगयाहो
हसीनरुख़सारउफ़तुम्हारेकिगोयापर्वतपिघलरहाहै
बचीहोअबतकजोबद-नज़रसेख़ुदाकेहिफ़्ज़-ओ-अमानमेंहो
तुम्हारासदक़ाख़ुदाकीरहमेंकिसीकेघरसेनिकलरहाहै
जिसेमुयस्सरनहींहुईहैवोख़ूबजानेहैक्यामुहब्बत
तुझेहैहासिलजोयेकलीतोक़दमतलेक्यूँकुचलरहाहै
बुलंदहोहौसलाअगरचेतोग़ैरमुमकिननहींहैकुछभी
येकश्तीतूफ़ाँमेंचलरहीहैचराग़आँधीमेंजलरहाहै
समेटलेगाख़ुदायेदुनियातुम्हारेजानेकेबादफ़ौरन
तुम्हारीसाँसेंचलेंगीतबतकयेदौर-ए-दुनियाभीचलरहाहै
वोसुर्ख़लबसेयूँँमुस्कुरानाचमकतीआँखोंकारूठजाना
फ़क़तवोचेहरानहींहै'वासिफ़'तेरेलिएतोग़ज़लरहाहै
  - Wasif Iqbal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy