jo zulm dhaaye hain tune zalim k | जो ज़ुल्म ढाए हैं तूने ज़ालिम कभी तो तुझ से सवाल होगा

  - Wasif Iqbal
जोज़ुल्मढाएहैंतूनेज़ालिमकभीतोतुझसेसवालहोगा
कभीअज़िय्यतमेंतड़पेगातूकभीतेराभीयेहालहोगा
बनालेमंज़िलतूआसमाँमेंज़मींपेजितनेमहलबनाले
येबातजैसेहीमैंपेआईवहींसेतेराज़वालहोगा
येताजपोशीतोजायज़ाहैकिसरसेकितनेहीताजउछले
हैआज़माइशबुलंदीतेरीबुलंदरहनाकमालहोगा
सभीकामुझसेहीरंजहैहाँसभीकामुझपरहीहैनिशाना
अभीसेदिलमेंयेवसवसाहैतोराहचलनामुहालहोगा
हैऐश-ओ-इशरतकाकोईतालिबकिसीनेहरदमलहूबहाए
मेरेपसीनेसेकुछनहींतोयेरिज़्कमेराहलालहोगा
मिलाकेनज़रेंनज़रचुरानाझुकाकेसरकोयूँँमुस्कुराना
जोबैठीचुपचापतुमरहोगीतोकैसेअपनाविसालहोगा
बिछड़रहेहोतोजानलोयेकिराहदेखेंगेहमतुम्हारी
सदाएँदेनाबुलानामुझकोजोफ़ैसलेपरमलालहोगा
गुनाहमेंमुब्तलासभीहैंहैंशिर्क़केकुछनिशान'वासिफ़'
उठीनज़रसेज़बाँदराज़ीयेरंगचेहरेकालालहोगा
  - Wasif Iqbal
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