usoolon pe jahaan aanch aa.e takr | उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है

  - Waseem Barelvi
उसूलोंपरजहाँआँचआएटकरानाज़रूरीहै
जोज़िंदाहोतोफिरज़िंदानज़रआनाज़रूरीहै
नई'उम्रोंकीख़ुदमुख़्तारियोंकोकौनसमझाये
कहाँसेबचकेचलनाहैकहाँजानाज़रूरीहै
थकेहारेपरिन्देजबबसेरेकेलिएलौटें
सलीक़ामन्दशाख़ोंकालचकजानाज़रूरीहै
बहुतबेबाकआँखोंमेंत'अल्लुक़टिकनहींपाता
मुहब्बतमेंकशिशरखनेकोशर्मानाज़रूरीहै
सलीक़ाहीनहींशायदउसेमहसूसकरनेका
जोकहताहैख़ुदाहैतोनज़रआनाज़रूरीहै
मेरेहोंठोंपेअपनीप्यासरखदोऔरफिरसोचो
किइसकेबादभीदुनियामेंकुछपानाज़रूरीहै
  - Waseem Barelvi
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