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Wajid Husain Sahil
isi li.e mujhe nanihaal hashr lagta hai
isi li.e mujhe nanihaal hashr lagta hai | इसी लिए मुझे ननिहाल हश्र लगता है
- Wajid Husain Sahil
इसी
लिए
मुझे
ननिहाल
हश्र
लगता
है
वहाँ
भी
माँ
की
बदौलत
पुकारा
जाता
हूँ
- Wajid Husain Sahil
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माँ
के
आँसू
को
समझता
हूँ
मुक़द्दस
इतना
बस
उन्हें
चूम
ले
अफ़ज़ल
तो
वज़ू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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सबको
बस
पानी
पीने
से
मतलब
है
बस
माँ
को
चिंता
है
मटका
भरने
की
Tanoj Dadhich
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मुझपे
पड़ती
नहीं
बलाओं
की
धूप
सर
पे
साया-फ़िगन
है
माँ
की
दु'आ
Amaan Haider
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मुद्दतों
ब'अद
मुयस्सर
हुआ
माँ
का
आँचल
मुद्दतों
ब'अद
हमें
नींद
सुहानी
आई
Iqbal Ashhar
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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कल
अपने-आप
को
देखा
था
माँ
की
आँखों
में
ये
आईना
हमें
बूढ़ा
नहीं
बताता
है
Munawwar Rana
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अश्क
माँ
के
जो
ख़ुशी
से
गिरे
तो
हैं
मोती
और
छलके
जो
ग़मों
से
तो
लहू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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अब
शहर
की
थकावट
बेचैन
कर
रही
है
अब
शाम
हो
गई
है
चल
माँ
से
बात
कर
लें
Akash Rajpoot
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वो
उजला
हो
कि
मैला
हो
या
महँगा
हो
कि
सस्ता
हो
ये
माँ
का
सर
है
इस
पर
हर
दुपट्टा
मुस्कुराता
है
Siraj Faisal Khan
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मैं
अपनी
नींद
को
अपडेट
कर
के
देखूँगा
फिर
अपने
ख़्वाब
को
रीसेट
कर
के
देखूँगा
हक़ीक़तों
से
अलग
आज
इक
हसीं
मंज़र
मैं
अपने
ज़ेहन
में
जनरेट
कर
के
देखूँगा
ये
जानता
हूँ
कोई
लौटता
नहीं
जाकर
मगर
मैं
फिर
भी
तेरा
वेट
कर
के
देखूँगा
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Wajid Husain Sahil
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मैंने
बरसों
इसी
उम्मीद
पे
काटीं
'साहिल'
उन
लबों
से
कभी
इज़हार
भी
हो
सकता
है
Wajid Husain Sahil
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मंतर
आँखों
से
पढ़
गई
जानाँ
बै-पिए
मुझको
चढ़
गई
जानाँ
हाल
अपना
भी
क़ैस
जैसा
है
अब
तो
दाढ़ी
भी
बढ़
गई
जानाँ
दिल
का
रस्ता
तुझे
दिखाया
था
तू
तो
माथे
पे
चढ़
गई
जानाँ
जुर्म
कर
के
तू
अपनी
आँखों
से
दिल
पे
इल्ज़ाम
मढ़
गई
जानाँ
जब
नज़र
से
नज़र
मिली
'साहिल'
दिल
के
सब
राज़
पढ़
गई
जानाँ
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Wajid Husain Sahil
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ख़िरद
ने
दी
जो
दबिश
मेरे
दफ़्तरे-दिल
पर
तेरा
ख़याल
मिला
है
मेरे
ठिकानों
से
Wajid Husain Sahil
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हाट
इक
रोज़
मेरे
गाँव
का
आकर
देखो
यहाॅं
फ़्रीज़र
नहीं
मिट्टी
के
घड़े
मिलते
हैं
Wajid Husain Sahil
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