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Wajid Husain Sahil
main apni neend ko update kar ke dekhoonga
main apni neend ko update kar ke dekhoonga | मैं अपनी नींद को अपडेट कर के देखूँगा
- Wajid Husain Sahil
मैं
अपनी
नींद
को
अपडेट
कर
के
देखूँगा
फिर
अपने
ख़्वाब
को
रीसेट
कर
के
देखूँगा
हक़ीक़तों
से
अलग
आज
इक
हसीं
मंज़र
मैं
अपने
ज़ेहन
में
जनरेट
कर
के
देखूँगा
ये
जानता
हूँ
कोई
लौटता
नहीं
जाकर
मगर
मैं
फिर
भी
तेरा
वेट
कर
के
देखूँगा
- Wajid Husain Sahil
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खिला
कर
भंग
की
गुजिया
समा
रंगीन
कर
दो
तुम
बड़ी
मुश्क़िल
से
तो
हो
पाया
है
दीदार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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इश्क़
का
ज़ौक़-ए-नज़ारा
मुफ़्त
में
बदनाम
है
हुस्न
ख़ुद
बे-ताब
है
जल्वा
दिखाने
के
लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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तेरी
आँखों
में
सारे
मनज़र
हैं
हम
कहाँ
हैं,
कहाँ
थे,
कब
होंगे
Meem Alif Shaz
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और
भी
दुनिया
में
मंज़र
ख़ूब-सूरत
हैं
मगर
तेरी
ज़ुल्फ़ों
झटकने
से
सुहाना
कुछ
नहीं
Alankrat Srivastava
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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इतनी
कोमल
हो
कोई
पुष्प
न
तोड़ा
तुमने
कैसे
'साहिल'
का
ह्रदय
तुमने
बलम
तोड़
दिया
Wajid Husain Sahil
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कोई
इतना
किसी
के
वास्ते
क्यूँ
ख़ास
होता
है
बिछड़
जाता
है
जब
वो
शख़्स
तो
एहसास
होता
है
Wajid Husain Sahil
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ज्ञान
पर
अभिमान
का
जो
इक
उदाहरण
हो
गया
और
फिर
अपने
पतन
का
ख़ुद
ही
कारण
हो
गया
क्या
अजब
इस
में
कि
इक
रावण
था
जो
ज्ञानी
हुआ
पर
अजब
तो
ये
है
इक
ज्ञानी
भी
रावण
हो
गया
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Wajid Husain Sahil
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जो
कह
रहे
हैं
आप
वो
कर
क्यूँँ
नहीं
जाते
जीने
से
शिकायत
है
तो
मर
क्यूँँ
नहीं
जाते
Wajid Husain Sahil
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हौसला
हार
गया,
ज़ब्त
ने
दम
तोड़
दिया
गिर
के
अश्कों
ने
तबस्सुम
का
भरम
तोड़
दिया
Wajid Husain Sahil
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