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Meem Alif Shaz
teri aankhoñ men saare manzar hain
teri aankhoñ men saare manzar hain | तेरी आँखों में सारे मनज़र हैं
- Meem Alif Shaz
तेरी
आँखों
में
सारे
मनज़र
हैं
हम
कहाँ
हैं,
कहाँ
थे,
कब
होंगे
- Meem Alif Shaz
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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जिस
शाने
पर
सर
रखते
हो
उस
शाने
पर
सो
जाते
हो
जाने
कैसे
दीदावर
हो
हर
मंज़र
में
खो
जाते
हो
Poonam Yadav
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सब
यार
सोचते
थे
रहेगा
वही
समाँ
इक
मैं
ही
बस
बचा
हूँ
कोई
सौ
पचास
में
Amaan Pathan
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एक
दफ़ा
बस
वापस
मंज़र
ऐसा
हो
हाथ
मेरा
सीधा
और
उल्टा
तेरा
हो
Tanoj Dadhich
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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दो
मुल्कों
के
सियासी
खेल
में
जाने
यहाँ
पर
कितनों
के
घर
उजड़े
हैं
मौला
वही
हर
सुब्ह
मंज़र
देखना
पड़ता
हज़ारों
लोग
यूँँ
ही
मरते
हैं
मौला
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Harsh saxena
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थोड़ा
सा
अक्स
चाँद
के
पैकर
में
डाल
दे
तू
आ
के
जान
रात
के
मंज़र
में
डाल
दे
Kaif Bhopali
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इश्क़
का
ज़ौक़-ए-नज़ारा
मुफ़्त
में
बदनाम
है
हुस्न
ख़ुद
बे-ताब
है
जल्वा
दिखाने
के
लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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हस्ती
का
नज़ारा
क्या
कहिए
मरता
है
कोई
जीता
है
कोई
जैसे
कि
दिवाली
हो
कि
दिया
जलता
जाए
बुझता
जाए
Nushur Wahidi
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निगाहों
के
तक़ाज़े
चैन
से
मरने
नहीं
देते
यहाँ
मंज़र
ही
ऐसे
हैं
कि
दिल
भरने
नहीं
देते
हमीं
उन
से
उमीदें
आसमाँ
छूने
की
करते
हैं
हमीं
बच्चों
को
अपने
फ़ैसले
करने
नहीं
देते
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Waseem Barelvi
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इश्क़
की
आदत
से
मजबूर
थी
वो
भोली
लड़की
वरना
दुल्हन
बन
के
रुख़सत
हो
जाती
अब
तक
Meem Alif Shaz
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हम
मोहब्बत
नहीं
करते
तो
बिखर
जाते
तुम
पास
अपने
नहीं
रखते
तो
किधर
जाते
तुम
Meem Alif Shaz
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इतनी
जल्दी
अच्छा
मैं
कैसे
बनूँ
यह
मरहला
है
हर
किसी
का
हिस्सा
मैं
कैसे
बनूँ
यह
मरहला
है
सब
मुझे
मासूम
कहकर
लूटलें
हर
इक
तरह
से
इस
तरह
का
बच्चा
मैं
कैसे
बनूँ
यह
मरहला
है
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Meem Alif Shaz
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कब्र
में
रौशनी
ज़रूरी
है
तो
चलो
ज़िन्दगी
सँवारे
हम
Meem Alif Shaz
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वो
कुछ
कहता
नहीं
दिक़्क़त
यही
तो
है
ख़मोशी
मार
देती
है
ख़मोशी
से
Meem Alif Shaz
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