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Meem Alif Shaz
itni jal
itni jal | इतनी जल्दी अच्छा मैं कैसे बनूँ यह मरहला है
- Meem Alif Shaz
इतनी
जल्दी
अच्छा
मैं
कैसे
बनूँ
यह
मरहला
है
हर
किसी
का
हिस्सा
मैं
कैसे
बनूँ
यह
मरहला
है
सब
मुझे
मासूम
कहकर
लूटलें
हर
इक
तरह
से
इस
तरह
का
बच्चा
मैं
कैसे
बनूँ
यह
मरहला
है
- Meem Alif Shaz
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इश्क़
को
छोड़
सब
चुन
लिया
उसने
फिर
रख
दिया
फल
को
फिर
टोकरी
से
अलग
Neeraj Neer
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मैं
अपने
आप
में
गहरा
उतर
गया
शायद
मिरे
सफ़र
से
अलग
हो
गई
रवानी
मिरी
Abbas Tabish
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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मोहब्बत
में
नहीं
है
फ़र्क़
जीने
और
मरने
का
उसी
को
देख
कर
जीते
हैं
जिस
काफ़िर
पे
दम
निकले
Mirza Ghalib
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हक़ीक़ी
और
मजाज़ी
शा'इरी
में
फ़र्क़
ये
पाया
कि
वो
जा
में
से
बाहर
है
ये
पाजा
में
से
बाहर
है
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Akbar Allahabadi
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बच
गया
है
जो
तेरा
थोड़ा
सा
हिस्सा
मुझ
में
अब
तलक
मुझको
किसी
का
नहीं
होने
देता
Khan Janbaz
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हिन्दी
में
और
उर्दू
में
फ़र्क़
है
तो
इतना
वो
ख़्वाब
देखते
हैं
हम
देखते
हैं
सपना
Unknown
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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गुलाबी
होंट
भी
नज़दीक
थे
पर,
हमारे
होंट
ने
माथा
छुआ
था
हमारी
प्यास
भी
सब
सेे
अलग
थी,
हमारा
ज़ब्त
भी
सब
सेे
जुदा
था
Satya Prakash Soni
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हम
क़ाफ़िले
से
बिछड़े
हुए
हैं
मगर
'नबील'
इक
रास्ता
अलग
से
निकाले
हुए
तो
हैं
Aziz Nabeel
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उस
को
हक़
है
कि
वो
बेवफ़ाई
करे
हाँ
मगर
जब
करे
इक
तिहाई
करे
उस
को
मेरे
भी
हक़
का
पता
हो
कि
वो
ज़ख़्म
से
पहले
इस
की
दवाई
करे
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Meem Alif Shaz
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उड़ते
उड़ते
नहीं
थकते
परिंदे
भी
वो
सब
भी
तो
मशाली
हैं
चमत्कारी
Meem Alif Shaz
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है
आदमी
उलझा
हुआ
कुछ
सच
सही
कुछ
झूठ
भी
Meem Alif Shaz
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इतनी
तो
मसरूफ़ियत
देखी
नहीं
थी
चलते
चलते
पूछते
हैं
तुम
कहाँ
हो
Meem Alif Shaz
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मेरी
फ़ितरत
भी
तो
आईने
जैसी
है
मैं
झूठों
को
सच्चाई
दिखाता
रहता
हूँ
Meem Alif Shaz
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