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Wajid Husain Sahil
maine barson isee ummeed pe kaateen saahil
maine barson isee ummeed pe kaateen saahil | मैंने बरसों इसी उम्मीद पे काटीं 'साहिल'
- Wajid Husain Sahil
मैंने
बरसों
इसी
उम्मीद
पे
काटीं
'साहिल'
उन
लबों
से
कभी
इज़हार
भी
हो
सकता
है
- Wajid Husain Sahil
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इस
दुनिया
के
कहने
पर
उम्मीद
न
रक्खो
पत्थर
रख
लो
सीने
पर
उम्मीद
न
रक्खो
Vishal Singh Tabish
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इस
उम्मीद
पे
रोज़
चराग़
जलाते
हैं
आने
वाले
बरसों
ब'अद
भी
आते
हैं
Zehra Nigaah
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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बुलाया
शाम
को
लेकिन
वहाँ
मैं
सुब्ह
जा
बैठा
सुना
था
देर
से
आना
उसे
अच्छा
नहीं
लगता
Krishnakant Kabk
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किस
से
उम्मीद
करें
कोई
इलाज-ए-दिल
की
चारा-गर
भी
तो
बहुत
दर्द
का
मारा
निकला
Lutf Ur Rahman
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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जनम
दिन
पर
घड़ी
दी
थी
उन्होंने
हमें
उम्मीद
थी
वो
वक़्त
देंगे
Harsh saxena
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तूफ़ान
की
उम्मीद
थी
आँधी
नहीं
आई
वो
आप
तो
क्या
उस
की
ख़बर
भी
नहीं
आई
शायद
वो
मोहब्बत
के
लिए
ठीक
नहीं
था
शायद
ये
अँगूठी
उसे
पूरी
नहीं
आई
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Khurram Afaq
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तेरे
आने
की
इक
उम्मीद
है
और
इसी
उम्मीद
पर
क़ाएम
है
दुनिया
Shubham Sarkar
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सर्द
रात
है
हवा
भी
सोच
मत
पहन
मुझे
सुब्ह
देख
लेंगे
किस
कलर
की
शाल
लेनी
है
Neeraj Neer
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ये
तो
मालूम
था
उल्फ़त
में
ख़सारा
होगा
पर
ये
सोचा
ही
नहीं
सिर्फ़
हमारा
होगा
Wajid Husain Sahil
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उनके
वादे
पे
कर
लिया
था
यक़ीं
रात
भर
जागती
रहीं
आँखें
Wajid Husain Sahil
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किसी
कॉलेज
में
पढ़ाता,
कहीं
टीचर
होता
तू
जो
लाइफ़
में
न
आती
तो
मैं
अफ़सर
होता
अब
तो
ये
हाल
है
नदियों
सा
सिमट
बैठा
हूँ
तिरे
चक्कर
में
न
पड़ता
तो
समुंदर
होता
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Wajid Husain Sahil
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उम्र-भर
मुझको
यही
बात
चुभेगी
'साहिल'
वो
भी
रोई
थी
बहुत
मुझ
सेे
किनारा
कर
के
Wajid Husain Sahil
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कैसी
अब
सालगिरह
कैसी
बधाई
लोगों
वो
जो
बिछड़ा
तो
मेरी
उम्र
घटा
दी
उसने
Wajid Husain Sahil
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