khushboo hai k | ख़ुश्बू है कभी गुल है कभी शम्अ कभी है

  - Waheed Akhtar
ख़ुश्बूहैकभीगुलहैकभीशम्अकभीहै
वोआतिश-ए-सय्यालजोसीनेमेंभरीहै
बादा-तलबीशौक़कीदरयूज़ा-गरीहै
सद-शुक्रकितक़दीरहीयाँतिश्ना-लबीहै
ग़ुंचोंकेचटकनेकासमाँदिलमेंअभीहै
मिलनेमेंजोउठउठकेनज़रउनकीझुकीहै
अबज़ब्तसेकहदेकियेरुख़्सतकीघड़ीहै
वहशत-ए-ग़मदेरसेक्यासोचरहीहै
मासूमहैयादउनकीभटकजाएरस्ता
ख़ूँ-गश्तातमन्नाओंकीक्यूँँभीड़लगीहै
यादोंसेकहोसोला-सिंगारआजकराएँ
आईना-ब-कफ़हसरत-ए-दीदारखड़ीहै
लबसीलिएअंदेशा-ए-दुश्नाम-ए-जहाँसे
अबअपनीख़मोशीहीइकअफ़्सानाबनीहै
ठहरीहैतोइकचेहरेपेठहरीरहीबरसों
भटकीहैतोफिरआँखभटकतीहीरहीहै
  - Waheed Akhtar
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