ham jo toote to gham-e-dehr ka paimaana bane | हम जो टूटे तो ग़म-ए-दहर का पैमाना बने

  - Waheed Akhtar
हमजोटूटेतोग़म-ए-दहरकापैमानाबने
ख़ाकमेंमिलकेभीख़ाक-ए-रह-ए-मय-खानाबने
कौनइसबज़्ममेंसमझेगाग़म-ए-दिलकीज़बाँ
बातछोटीसीजबअफ़्साना-दर-अफ़्सानाबने
संग-अंदाज़ोंसेऊँचाहैबहुतअपनामक़ाम
वर्नामुमकिनथानिशानासर-ए-दीवानाबने
शहर-ए-जानाँसेभीहमलाएमोहब्बतकाख़िराज
क्याज़रूरीहैकियाँवज़-ए-गदायानाबने
वहशतआमादा-ए-रुसवाईहैबे-ख़ौफ़जहाँ
ज़ब्तकाहैयेतक़ाज़ाकितमाशाबने
ज़िंदगीहमतिरेइतनेतोख़ता-वारथे
किजिसेअपनाबनाएँवहीबेगानाबने
इकतमन्नाकोईऐसातोबड़ाजुर्मथी
आँखता-मर्गछलकताहुआपैमानाबने
क्यारिफ़ाक़तहैयहीदिल-ए-आशुफ़्ता-मिज़ाज
देखहमएकतिरेवास्तेक्याक्याबने
अजनबीलगतेहैंहमअपनीनज़रकोख़ुदही
आपअपनेसेइतनाकोईबेगानाबने
हमपेइकउम्रसेतारीहैख़मोशीऐसी
एकनक़्शेपेसिमटजाएतोअफ़्सानाबने
मिरेहौसला-ए-ग़महैयहीवक़्त-ए-वफ़ा
ज़हरहीहासिल-ए-सद-उम्र-ए-तमन्नाबने
ज़िंदगीकरनेकेअंदाज़तोभूलो'वहीद'
तुमनेक्यासीखाअगरइश्क़सलीक़ाबने
  - Waheed Akhtar
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