katara ke gulsitaan se jo soo-e-qafas chale | कतरा के गुल्सिताँ से जो सू-ए-क़फ़स चले

  - Waheed Akhtar
कतराकेगुल्सिताँसेजोसू-ए-क़फ़सचले
ऐसीकोईहवाभीतोअबकेबरसचले
आदाब-ए-क़ाफ़िलाभीहैंज़ंजीर-ए-पा-ए-शौक़
येक्यासफ़रअसीर-ए-सदा-ए-जरसचले
मानाहवा-ए-गुलसेथेबे-इख़्तियारहम
फिरभीबचाकेराहकाहरख़ार-ओ-ख़सचले
पामालहोकेरहगएजश्न-ए-बहारमें
येफ़िक्रथीचमनपेख़िज़ाँकाबसचले
चश्मा-ए-हयातदीतूनेबूँदभी
हमतिश्ना-कामअब्रकीसूरतबरसचले
सुब्हेंभीकेज़हररग-ए-जाँमेंभरदें
हिज्रान-ए-यारतेरेअँधेरेतोडसचले
उनकीयेज़िदवोदेखेंगदा-ए-रफ़ूहमें
हमकोयेफ़िक्रउनकेगरेबाँपेबसचले
थापास-ए-आबरू-ए-तमन्नाहमें'वहीद'
चुनकरगुल-ए-मुरादसबअहल-ए-हवसचले
  - Waheed Akhtar
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