daftar-e-lauh o qalam ya dar-e-gham khulta hai | दफ़्तर-ए-लौह ओ क़लम या दर-ए-ग़म खुलता है

  - Waheed Akhtar
दफ़्तर-ए-लौहक़लमयादर-ए-ग़मखुलताहै
होंटखुलतेहैंतोइकबाब-ए-सितमखुलताहै
हर्फ़-ए-इंकारहैक्यूँँनार-ए-जहन्नमकाहलीफ़
सिर्फ़इक़रारपेक्यूँँबाब-ए-इरमखुलताहै
आबरूहोजोप्यारीतोयेदुनियाहैसख़ी
हाथफैलाओतोयेतर्ज़-ए-करमखुलताहै
माँगनेवालोंकोक्याइज़्ज़तरुस्वाईसे
देनेवालोंकीअमीरीकाभरमखुलताहै
बंदआँखेंरहींमेलाहैलुटेरोंकालगा
अश्कलुटजातेहैंजबदीदा-ए-नमखुलताहै
जानदेनेमेंजोलज़्ज़तहैबचानेमेंकहाँ
दिलकिसीसेजोबंधेउक़्दा-ए-ग़मखुलताहै
साथरहताहैसदामहफ़िलतन्हाईमें
दिल-ए-रम-ख़ुरदामगरहमसेभीकमखुलताहै
देखोपस्तीसेतोहरएकबुलंदीहैराज़
जादा-ए-कोहफ़क़तज़ेर-ए-क़दमखुलताहै
क़र्ज़अदाकरनाहैजाँकातोचलोमक़्तलमें
खिंचगईबागबजातब्ल-ओ-अलमखुलताहै
  - Waheed Akhtar
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