hari masjid ki halki dhoop men | हरी मस्जिद की हल्की धूप में

  - Waheed Ahmad
हरीमस्जिदकीहल्कीधूपमें
ताज़ावज़ूसेगीलेपाँव
औरटपकतीआस्तीनोंकीचमकमेंलोगथे
जोसफ़-ब-सफ़
अपनाजनाज़ापढ़रहेथे
सदरदरवाज़ेसे
इकबारूदमेंडूबाहुआ
जन्नतकासट्टा-बाज़औरहूरोंकासौदागर
अचानकसहवकासज्दाअदाकरनेकोआया
औरहरीमस्जिदनेअपनारंगबदला
क़ुर्मुज़ीदहलीज़परजितनेभीजूतेथे
वोताज़ाख़ूनपरपहलेतोतेरे
औरफिर
जमतेलहूपरजमगए
मैंबचपनमें
कईमुल्कोंकेसिक्केऔरटिकटेंजमाकरताथा
बयाज़-ए-ज़हनकेतारीकपन्नोंपर
मैंअबजिस्मोंकेटुकड़ेजमाकरताहूँ
मिरीएल्बमकेसफ़्होंकीतहोंसेख़ूँनिकलताहै
मिरीआँखोंसेरिसताहै
  - Waheed Ahmad
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