सहरासेतिरेचाहनेवालेनहींउठते
हैंरक़्सकेआलममेंसुलगतेहुएचेहरे
ऐसेतोकिसीघरसेजनाज़ेनहींउठते
इकप्यासनेकैसायेमुझेतोड़दियाहै
हाथोंसेमिरेआजभीकूज़ेनहींउठते
सूरजकेतमांचेसेफ़लकजागगयाहै
बिस्तरसेमगरफिरभीसितारेनहींउठते
घरअपनेनमाज़ीतोसभीलौटगएहैं
मस्जिदसेमगरआजमुसल्लेनहींउठते
मुद्दतसेशब-ओ-रोज़केमाथेपेलिखाहै
आजाएँजोइकबारज़मानेनहींउठते
हैउसकेअज़ाबोंपेकरमउसकामुसल्लत
रहमतकेकभीघरसेफ़रिश्तेनहींउठते