mausam ho koi yaad ke khe | मौसम हो कोई याद के खे़

  - Wafa Naqvi
मौसमहोकोईयादकेखे़
मेंनहींउठते
सहरासेतिरेचाहनेवालेनहींउठते
हैंरक़्सकेआलममेंसुलगतेहुएचेहरे
ऐसेतोकिसीघरसेजनाज़ेनहींउठते
इकप्यासनेकैसायेमुझेतोड़दियाहै
हाथोंसेमिरेआजभीकूज़ेनहींउठते
सूरजकेतमांचेसेफ़लकजागगयाहै
बिस्तरसेमगरफिरभीसितारेनहींउठते
घरअपनेनमाज़ीतोसभीलौटगएहैं
मस्जिदसेमगरआजमुसल्लेनहींउठते
मुद्दतसेशब-ओ-रोज़केमाथेपेलिखाहै
जाएँजोइकबारज़मानेनहींउठते
हैउसकेअज़ाबोंपेकरमउसकामुसल्लत
रहमतकेकभीघरसेफ़रिश्तेनहींउठते
  - Wafa Naqvi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy