kabhi jo dhoop hamaare makaan men aa jaa.e | कभी जो धूप हमारे मकाँ में आ जाए

  - Wafa Naqvi
कभीजोधूपहमारेमकाँमेंजाए
तोसाया-दारशजरभीअमाँमेंजाए
मैंशाहज़ादानहींतोफ़क़ीरहीबेहतर
कहींतोज़िक्रमिरादास्ताँमेंजाए
मैंतेरानामसलीक़ेसेतोपुकारूँमगर
ख़ुदा-न-ख़्वास्तालुक्नतज़बाँमेंजाए
किसेडुबोनाहैऔरकिसकोपारकरनाहै
शुऊ'रइतनातोआब-ए-रवाँमेंजाए
मैंएकलम्हेकोसदियोंकीज़िंदगीसमझूँ
मिरायक़ींजोहिसार-ए-गुमाँमेंजाए
झुलसचुकाहैबहुतधूपमेंबदनमेरा
सोउससेकहताहूँअबसाएबाँमेंजाए
मैंअपनीअक़्लसेकुछऔरकामलेलूँगा
कभीयेदिलभीमिराइम्तिहाँमेंजाए
सफ़रकीसारीअज़िय्यतपेख़ाकउड़तीहै
भटककेकोईअगरकारवाँमेंजाए
मैंजिसकोराज़बताताहूँअपनीख़ल्वतके
अजबनहींकिसफ़-ए-दुश्मनाँमेंजाए
  - Wafa Naqvi
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