kahii andhere kahii raushni se darte hue | कहीं अंधेरे कहीं रौशनी से डरते हुए

  - Wafa Naqvi
कहींअंधेरेकहींरौशनीसेडरतेहुए
तमाम-उम्रगुज़ारीहैहमनेमरतेहुए
उड़ाकेलेतोगईशाख़सेसभीपत्ते
हवानेदुखभीपूछामिरागुज़रतेहुए
कहींयेख़्वाबसीतस्वीरबोलउट्ठीतो
ख़यालआयामुसव्विरकोरंगभरतेहुए
उसेतोबोझउठानाथाअपनीहस्तीका
वोमुस्कुरासकाआजभीसँवरतेहुए
येज़िंदगीकाबयाबाँअगरइजाज़तदे
ज़रासीधूपउठालूँयहाँठहरतेहुए
  - Wafa Naqvi
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