bas yahii baat yahaañ harf-e-malaamat ki hai | बस यही बात यहाँ हर्फ़-ए-मलामत की है

  - Wafa Naqvi
बसयहीबातयहाँहर्फ़-ए-मलामतकीहै
मैंनेदरियाकीनहींदश्तकीबैअ'तकीहै
क़त्लसूरजकोकियावोभीछुपाकरख़ंजर
शामवालोंनेसहरमेंयेसियासतकीहै
वर्नाक्याहमकोग़रज़हालतुम्हारापूछें
बातयेकुछभीनहींसिर्फ़मोहब्बतकीहै
हमतोमौजोंसेलड़ेऔरकिनारेपहुँचे
हमनेकबडूबतीकश्तीकीहिमायतकीहै
अभीदालानमेंउतरेनहींशबकेसाए
जानेवालेनेसुनायेहैकिउजलतकीहै
अबअंधेरेहीअंधेरेहैंगली-कूचोंमें
चाँद-तारोंनेमिरेशहरसहिजरतकीहै
येअलगबातकिअल्फ़ाज़हैंअबभीरौशन
तेरेख़ंजरनेतोइसबारभीजुरअतकीहै
अबउसेढूँडनेनिकलीहैंबरहनायादें
जिसनेकाग़ज़केलिबासोंकीतिजारतकीहै
मेरेहोंटोंपेख़मोशीकेपड़ेहैंताले
मेरीआँखोंनेमिरीआजभीशोहरतकीहै
  - Wafa Naqvi
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