zindagi ki tha alaamat ik hunar be-jaan sa | ज़िंदगी की था अलामत इक हुनर बे-जान सा

  - Wafa Naqvi
ज़िंदगीकीथाअलामतइकहुनरबे-जानसा
रहगयातस्वीरकोईदेखकरहैरानसा
तेरीयादेंदफ़्नकरदेतीहैंउसकेज़ोरको
रोज़उठतातोहैदिलमेंजा-ब-जातूफ़ानसा
रौनक़-ए-शहर-ए-रियाताख़ीरहोनीथीहुई
रास्तेमेंपड़गयाथाइकखंडरवीरानसा
आपआएँगेतोवहशतसाथलेकरआएँगे
रास्ताआताहैमेरेघरपेइकसुनसानसा
पूछनेआतानहींकोईमिरेहालातअब
मैंवतनमेंहोगयाहूँअपनेहीअंजानसा
जबसफ़रतयकरलियातबइसकाअंदाज़ाहुआ
देखनेकोरास्तातोथाबहुतआसानसा
कोईपूछेराहबरसेरख़्त-ए-जाँरख़्त-ए-सफ़र
क़ाफ़िलाजाताकहाँहैबे-सर-ओ-सामानसा
काग़ज़ीफूलोंपेतितलीकोईआईनहीं
मेज़पररक्खाहुआथायूँँतोइकगुल-दानसा
  - Wafa Naqvi
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