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Vivek Chaturvedi
hawa bujha deti hai jinke ghar ke chiraagon ko vo
hawa bujha deti hai jinke ghar ke chiraagon ko vo | हवा बुझा देती है जिनके घर के चिरागों को वो
- Vivek Chaturvedi
हवा
बुझा
देती
है
जिनके
घर
के
चिरागों
को
वो
जला
नहीं
सकते
अपने
हाथों
से
चिरागों
को
वो
- Vivek Chaturvedi
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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रखते
हैं
मोबाइल
में
मोहब्बत
की
निशानी
अब
फूल
किताबों
में
छुपाया
नहीं
करते
Meharban Amrohvi
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मैंने
चाहा
भी
कि
फिर
इस
संग-दिल
पे
फूल
उगे
पर
तुम्हारी
रुख़्सती
के
बाद
ये
होता
नहीं
Siddharth Saaz
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मैं
बाग़
में
जिस
जगह
खड़ा
हूँ
हर
फूल
से
काम
चल
रहा
है
Shaheen Abbas
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अब
ज़ख़्म
ज़ख़्म
से
मेरा
पाँव
भर
चुका
था
यानी
बहुत
से
रस्तों
से
मैं
गुज़र
चुका
था
Vivek Chaturvedi
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फिल्मी
विलिनो
से
कम
थोड़ी
न
है
ये
कोरोना
गर
जान
से
मिलने
जाओ
तो
जान
को
ख़तरा
है
Vivek Chaturvedi
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झूठा
था
मैं
भी,
जब
सच
बोलूँगा
देख
लेना
जब
भी
मैं
राज़
तेरा
खोलूँगा
देख
लेना
सच्चा
हूँ
मैं
फ़क़त
जब
तक
झूठ
बोलता
हूँ
झूठा
कहेंगे
जब
सच
बोलूँगा
देख
लेना
जो
बात
कहती
थी
ये
दुनिया
फ़क़त
अभी
तक
तुम
भी
कहोगी
जब
सच
बोलूँगा
देख
लेना
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Vivek Chaturvedi
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वो
लोग
सब
के
सब
हमारे
लोग
हैं
जो
भी
मोहब्बत
के
ही
मारे
लोग
हैं
हम
अपने
जानिब
से
अकेले
हैं
मगर
दुश्मन
के
जानिब
भी
हमारे
लोग
हैं
काफ़ी
हैं
आँखें
ये
किसी
के
क़त्ल
को
ये
लोग
हाए
कितने
प्यारे
लोग
हैं
हैरत
है
प्यासे
कैसे
रह
जाते
हैं
वो
जो
भी
समुंदर
के
किनारे
लोग
हैं
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Vivek Chaturvedi
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इस
परिंदे
को
शज़र
में
लौटना
है
अब
मुझे
तेरी
नज़र
में
लौटना
है
Vivek Chaturvedi
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