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Vivek Chaturvedi
is parinde ko shazr men lautna hai
is parinde ko shazr men lautna hai | इस परिंदे को शज़र में लौटना है
- Vivek Chaturvedi
इस
परिंदे
को
शज़र
में
लौटना
है
अब
मुझे
तेरी
नज़र
में
लौटना
है
- Vivek Chaturvedi
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तेरी
निगाह-ए-नाज़
से
छूटे
हुए
दरख़्त
मर
जाएँ
क्या
करें
बता
सूखे
हुए
दरख़्त
हैरत
है
पेड़
नीम
के
देने
लगे
हैं
आम
पगला
गए
हैं
आपके
चू
में
हुए
दरख़्त
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Varun Anand
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ले
दे
के
अपने
पास
फ़क़त
इक
नज़र
तो
है
क्यूँँ
देखें
ज़िंदगी
को
किसी
की
नज़र
से
हम
Sahir Ludhianvi
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मुयस्सर
हमें
ख़्वाब-ओ-राहत
कहाँ
ज़रा
आँख
झपकी
सहर
हो
गई
Dagh Dehlvi
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नज़र
आए
न
तू
जिनको
परेशानी
से
मरते
हैं
जो
तुझको
देख
लेते
हैं
वो
हैरानी
से
मरते
हैं
Varun Anand
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हम
जिसे
देखते
रहते
थे
उम्र
भर
काश
वो
इक
नज़र
देखता
हम
को
भी
Mohsin Ahmad Khan
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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ज़िंदगी
इक
फ़िल्म
है
मिलना
बिछड़ना
सीन
हैं
आँख
के
आँसू
तिरे
किरदार
की
तौहीन
हैं
Sandeep Thakur
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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माँ
जैसे
देखती
हो
तुम
मगर
मैं
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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वो
चाहता
तो
मिटा
देता
मेरे
हाथों
की
लकीरों
को
मेरे
हाथों
की
लकीरें
भी
उसी
के
हाथ
में
थी
Vivek Chaturvedi
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दफ़ा
इक
ख़ुद-कुशी
तो
कर
चुका
है
मिरा
दिल
तुझपे
ही
तो
मर
चुका
है
तिरे
ख़ातिर
नहीं
दिल
में
जगह
अब
जहाँ
से
ही
मिरा
दिल
भर
चुका
है
मिलो
अब
ज़िंदगी
इस
सेे,
कि
तेरा
दिवाना
इक
दफ़ा
तो
मर
चुका
है
करे
अब
दोस्ती
हम
कहता
है
वो
जो
मुझ
सेे
दुश्मनी
तो
कर
चुका
है
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Vivek Chaturvedi
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याद
कर
लेता
हूँ
रोज़
हर
किसी
को
ज़िन्दगी
जाने
कब
इम्तिहान
लेले
Vivek Chaturvedi
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बाँटते
हैं
वही
लोग
अक्सर
ज़मीं
लोग
वो
लड़ते
है
जो
ज़मीं
के
लिए
Vivek Chaturvedi
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हमको
आज़माया
जा
रहा
था
सबकुछ
सच
बताया
जा
रहा
था
पाबंदी
सिखाई
गई
हमें
जब
तब
भी
वक़्त
ज़ाया'
जा
रहा
था
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Vivek Chaturvedi
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