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Vivek Chaturvedi
hamko aazmaaya ja raha tha
hamko aazmaaya ja raha tha | हमको आज़माया जा रहा था
- Vivek Chaturvedi
हमको
आज़माया
जा
रहा
था
सबकुछ
सच
बताया
जा
रहा
था
पाबंदी
सिखाई
गई
हमें
जब
तब
भी
वक़्त
ज़ाया'
जा
रहा
था
- Vivek Chaturvedi
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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ये
तुम
भी
जानते
हो
कि
हालात
नर्म
है
कहने
को
कह
रहा
हूँ
कि
सब
ठीक
ठाक
है
shaan manral
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ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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क़ुबूल
है
जिन्हें
ग़म
भी
तेरी
ख़ुशी
के
लिए
वो
जी
रहे
हैं
हक़ीक़त
में
ज़िन्दगी
के
लिए
Nasir Kazmi
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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सच
कहें
तो
वो
कहानी
बीच
में
दम
तोड़
देगी
जिस
कहानी
को
सभी
किरदार
छोड़े
जा
रहे
हैं
Anurag Pandey
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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ये
सच
है
कि
पाँवों
ने
बहुत
कष्ट
उठाए
पर
पाँव
किसी
तरह
राहों
पे
तो
आए
Dushyant Kumar
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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वो
ऐसा
क्या
जादू
कर
जाते
हैं
ख़ाली
रहते
हैं
तो
भर
जाते
है
जो
देख
के
हमको
ज़िंदा
रहते
हैं
हम
देख
के
ही
उनको
मर
जाते
हैं
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Vivek Chaturvedi
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दिल
नहीं
है
मेरा
हर
किसी
के
लिए
वक़्त
मुझको
नहीं
आशिक़ी
के
लिए
इक
तेरी
चाह
है
हर
किसी
को
मगर
तू
बनी
तो
नहीं
हर
किसी
के
लिए
अब
भरोसा
कहाँ
है
किसी
का
यहाँ
ख़तरा
है
आदमी
आदमी
के
लिए
मौत
से
सामना
रोज़
होता
है
अब
रोज़
मरता
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
के
लिए
दरिया
हूँ
और
प्यासा
भी
हूँ
यानी
ये
ख़ुद
सबब
हूँ
मैं
अपनी
कमी
के
लिए
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Vivek Chaturvedi
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वो
लोग
सब
के
सब
हमारे
लोग
हैं
जो
भी
मोहब्बत
के
ही
मारे
लोग
हैं
हम
अपने
जानिब
से
अकेले
हैं
मगर
दुश्मन
के
जानिब
भी
हमारे
लोग
हैं
काफ़ी
हैं
आँखें
ये
किसी
के
क़त्ल
को
ये
लोग
हाए
कितने
प्यारे
लोग
हैं
हैरत
है
प्यासे
कैसे
रह
जाते
हैं
वो
जो
भी
समुंदर
के
किनारे
लोग
हैं
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Vivek Chaturvedi
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उनके
नजरों
में
चढ़
गए
हैं
हम
जिनके
नजरों
से
गिर
गए
थे
हम
Vivek Chaturvedi
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वो
चला
गया
फ़क़त
मेरे
एक
ग़लती
पे
ही
छोड़
के
मुझे
जो
कभी
मिरे
ही
ग़लती
पे
बोला
था
की
तुझे
छोड़ूँगा
नहीं
Vivek Chaturvedi
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