tiri jab neend ka daftar khula tha | तिरी जब नींद का दफ़्तर खुला था

  - Vishal Khullar
तिरीजबनींदकादफ़्तरखुलाथा
यक़ीननएकइकमंज़रखुलाथा
उसेतुमचाँदसेतश्बीहदेना
किउसकेहाथमेंख़ंजरखुलाथा
सुनादीवार-ओ-दरक्याकहरहेहैं
हमारीपीठपरनश्तरखुलाथा
नहींकितंगथींअपनीक़बाएँ
तुम्हारेजिस्मकापैकरखुलाथा
बदलतेमौसमोंकीतानटूटी
घटाओंपरमिरासाग़रखुलाथा
परी-पैकरसेजबभीबातहोती
मज़ेकीबातहैअक्सरखुलाथा
किसीकेहाथसोएथेसिरहाने
किसीकेहाथमेंख़ंजरखुलाथा
उड़ानेंजबभीथींमहदूद'खुल्लर'
हमारेनामकाशह-परखुलाथा
  - Vishal Khullar
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