na darmiyaañ na kahii ibtida men aaya hai | न दरमियाँ न कहीं इब्तिदा में आया है

  - Vishal Khullar
दरमियाँकहींइब्तिदामेंआयाहै
बदलकेभेसमिरीइंतिहामेंआयाहै
उसीकेरूपकाचर्चाहैअबफ़ज़ाओंमें
हवाकेरुख़कोपलटकरहवामेंआयाहै
कभीजोतेज़हुईलौतोजगमगाउट्ठा
बरहनाथाजोकभीअबक़बामेंआयाहै
मुझेहैफूलकीपत्तीसाअबबिखरजाना
वोछुप-छुपाकेमिरीहीरिदामेंआयाहै
असीर-ए-ज़ुल्फ़कोशायदयहींरिहाईहै
पुकारताहूँजिसेवोसदामेंआयाहै
निगलगईहैतसव्वुरकीआँचआँचइसे
कोईवजूदकिसीसानेहामेंआयाहै
मैंछेड़ताहूँसमुंदरकीधुनमेंनग़्मोंको
वहीजोरागदिल-ए-मुतरिबामेंआयाहै
उसीकेशे'रसभीऔरउसीकेअफ़्साने
उसीकीप्यासकाबादलघटामेंआयाहै
  - Vishal Khullar
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