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Vikas Sahaj
udaasi ne mujhe jakda hua tha
udaasi ne mujhe jakda hua tha | उदासी ने मुझे जकड़ा हुआ था
- Vikas Sahaj
उदासी
ने
मुझे
जकड़ा
हुआ
था
किसी
का
साथ
यूँँ
छूटा
हुआ
था
रहेंगे
साथ
जब
तक
मन
मिलेगा
हमारे
बीच
ये
सौदा
हुआ
था
तुम्हारा
दोस्त
हूँ
मैं
सब
सेे
अच्छा
मुझे
भी
यार
ये
धोखा
हुआ
था
हमारे
बीच
रिश्ता
क्यूँ
नहीं
है
हमारा
आज
ही
झगड़ा
हुआ
था
हमारी
दोस्ती
है
उम्र
भर
की
बताओ
किसने
ये
बोला
हुआ
था
- Vikas Sahaj
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एक
दुख
ये
के
तू
मिलने
नहीं
आया
मुझ
सेे
एक
दुख
ये
के
उस
दिन
मेरा
घर
ख़ाली
था
Tehzeeb Hafi
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लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
Bhaskar Shukla
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रोना
पड़ेगा
बैठ
के
अब
देर
तक
मुझे
मैं
कहा
रहा
था
आपसे,
हँस
कर
न
देखिए
Munawwar Rana
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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सीधा-साधा
डाकिया
जादू
करे
महान
एक
ही
थैले
में
भरे
आँसू
और
मुस्कान
Nida Fazli
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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ज़िंदगी
इक
फ़िल्म
है
मिलना
बिछड़ना
सीन
हैं
आँख
के
आँसू
तिरे
किरदार
की
तौहीन
हैं
Sandeep Thakur
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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मैं
तेरे
पास
वापस
आ
रहा
हूँ
दुबारा
भेजना
मत
इस
धरा
पर
Vikas Sahaj
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उधारी
सर
से
ऊपर
बढ़
चुकी
है
हमारी
जान
जोखिम
में
पड़ी
है
हमीं
अपमान
सहकर
जी
रहे
हैं
अना
की
लाश
पंखे
पर
मिली
है
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Vikas Sahaj
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हो
नहीं
पाई
कभी
पूरी
ज़रूरत
लोग
करते
रह
गए
रब
की
इबादत
मुफ़लिसी
ने
जब
निकाला
घर
से
हमको
ठोकरें
खाते
रहे
छोड़ी
न
ग़ैरत
क्या
बताकर
क्या
बनाया
है
ख़ुदा
ने
हो
रही
है
देखकर
अब
ख़ुद
को
हैरत
धमकियाँ
अपमान
आँसू
डाँट
ज़िल्लत
कर
लिया
है
ज़ब्त
सब
तेरी
बदौलत
किसके
बदले
में
ख़रीदोगे
हमें
तुम
जिस्म
तो
है
ही
नहीं
उल्फ़त
की
क़ीमत
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Vikas Sahaj
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ख़्वाबों
की
ता'बीर
बनी
है
इक
लड़की
मेरे
मन
की
हीर
बनी
है
इक
लड़की
दुनिया
तुझ
को
कब
का
छोड़
चुके
होते
पैरों
की
ज़ंजीर
बनी
है
इक
लड़की
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Vikas Sahaj
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उसकी
निगाह-ए-नाज़
से
आगे
निकल
गए
यानी
फ़रेब-साज़
से
आगे
निकल
गए
हम
से
भी
रोक
लेने
की
ज़हमत
नहीं
हुई
तुम
भी
हर
इक
लिहाज़
से
आगे
निकल
गए
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Vikas Sahaj
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