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Vedic Dwivedi
usne khat ik raat likhe the aansoo se
usne khat ik raat likhe the aansoo se | उसने ख़त इक रात लिखे थे आँसू से
- Vedic Dwivedi
उसने
ख़त
इक
रात
लिखे
थे
आँसू
से
दिल
के
सब
जज़्बात
लिखे
थे
आँसू
से
- Vedic Dwivedi
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यादों
की
रेल
आज
वहीं
आ
के
रुक
गई
खेले
थे
हम
जहाँ
कभी
पटरी
पे
बैठकर
Munawwar Rana
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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मुहब्बत
उठ
गई
दोनों
घरों
से
सुना
है
एक
ख़त
पकड़ा
गया
है
Anjum Ludhianvi
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'ताहिर'
उन
बे-बस
लम्हों
का
अहद
निभाना
होगा
उस
ने
कहा
था
ख़त
मत
लिखना
ग़ज़लें
लिखते
रहना
Qayyum Tahir
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जिस
दिन
तुम्हारे
ख़त
का
मुझे
इंतिज़ार
था
उस
दिन
तमाम
पंछी
कबूतर
लगे
मुझे
Ali Rumi
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उसने
ख़त
का
जवाब
भेजा
है
चार
लेकिन
हैं
एक
हाँ
के
साथ
Fahmi Badayuni
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'आशिक़
का
ख़त
है
पढ़ना
ज़रा
देख-भाल
के
काग़ज़
पे
रख
दिया
है
कलेजा
निकाल
के
LALA RAKHA RAM BARQ
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हाकिम
को
इक
चिट्ठी
लिक्खो
सब
के
सब
और
उस
में
बस
इतना
लिखना
लानत
है
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Varun Anand
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प्यार
का
पहला
ख़त
लिखने
में
वक़्त
तो
लगता
है
नए
परिंदों
को
उड़ने
में
वक़्त
तो
लगता
है
Hastimal Hasti
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मैं
ने
उस
की
तरफ़
से
ख़त
लिक्खा
और
अपने
पते
पे
भेज
दिया
Fahmi Badayuni
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सांसों
के
बिन
वजूद
कहाँ
धड़कनों
का
है
माँ
से
कहो
गले
से
लगाए
न
लौटकर
Vedic Dwivedi
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वतन
से
हर
किसी
को
इश्क़
होता
है
लिखे
वेदिक
वतन
पर
जाँ
लुटाते
चल
Vedic Dwivedi
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तय
किया
जाए
कि
जाना
अब
कहाँ
है
लौटकर
हमको
भी
आना
अब
कहाँ
है
थी
मिला
करती
विदाई
लौटने
पर
वो
चलन
आख़िर
पुराना
अब
कहाँ
है
बोझ
कंधे
पर
उठा
घर
का
लिया
वो
घर
में
बेटे
का
ठिकाना
अब
कहाँ
है
रात
को
किस्से
नए
बाबा
सुनाते
खेत
में
लेकिन
मचाना
अब
कहाँ
है
एक
ही
था
कल
लुटा
आए
उसी
पर
हूँ
नहीं
तो
जाँ
लुटाना
अब
कहाँ
है
ये
मदद
तुम
लोगी
भी
तो
कैसे
लोगी
था
कभी
"दीपक"
दिवाना
अब
कहाँ
हैं
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Vedic Dwivedi
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तू
याद
आई
और
मैं
कल
देर
तक
रोया
तस्वीर
तेरी
रख
के
बग़ल
देर
तक
रोया
आंगन
जहाँ
पे
खेल
के
बचपन
बिताया
था
घर
अपना
वो
पुराना
बदल
देर
तक
रोया
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Vedic Dwivedi
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समुंदर
आँख
में
जिसके
हो
सिमटा
उसे
बारिश
ग़मों
की
क्या
भिगोएगी
Vedic Dwivedi
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