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Vedic Dwivedi
bichhad kar phir mile jo haal poochhenge
bichhad kar phir mile jo haal poochhenge | बिछड़ कर फिर मिले जो हाल पूछेंगे
- Vedic Dwivedi
बिछड़
कर
फिर
मिले
जो
हाल
पूछेंगे
मिरे
बिन
कैसे
गुज़रे
साल
पूछेंगे
नहीं
मुझ
सा
कोई
'आशिक़
ज़माने
में
मुझे
मालूम
है
फ़िलहाल
पूछेंगे
अदालत
में
है
ये
पेशा
वकीलों
का
सवालों
से
ही
हाल-ओ-चाल
पूछेंगे
यही
रस्ता
अगर
संसद
भवन
का
है
चलाएँ
कब-
तलक
हड़ताल
पूछेंगे
- Vedic Dwivedi
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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उसूली
तौर
पे
मर
जाना
चाहिए
था
मगर
मुझे
सुकून
मिला
है
तुझे
जुदा
कर
के
Ali Zaryoun
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दौलत
शोहरत
बीवी
बच्चे
अच्छा
घर
और
अच्छे
दोस्त
कुछ
तो
है
जो
इन
के
बाद
भी
हासिल
करना
बाक़ी
है
कभी-कभी
तो
दिल
करता
है
चलती
रेल
से
कूद
पड़ूॅं
फिर
कहता
हूॅं
पागल
अब
तो
थोड़ा
रस्ता
बाक़ी
है
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Zia Mazkoor
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औरों
का
बताया
हुआ
रस्ता
नहीं
चुनते
जो
इश्क़
चुना
करते
हैं,
दुनिया
नहीं
चुनते
Bhaskar Shukla
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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ज़रा
सी
देर
को
सकते
में
आ
गए
थे
हम
कि
एक
दूजे
के
रस्ते
में
आ
गए
थे
हम
जो
अपना
हिस्सा
भी
औरों
में
बाँट
देता
है
एक
ऐसे
शख़्स
के
हिस्से
में
आ
गए
थे
हम
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Ismail Raaz
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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दीवार
क्या
गिरी
मिरे
ख़स्ता
मकान
की
लोगों
ने
मेरे
सेहन
में
रस्ते
बना
लिए
Sibt Ali Saba
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शाम
भी
हो
गई
धुँदला
गई
आँखें
भी
मिरी
भूलने
वाले
मैं
कब
तक
तिरा
रस्ता
देखूँ
Parveen Shakir
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तेरी
बातें
ग़ज़ल
में
हम
पिरोएंगे
मिले
फ़ुर्सत
लिपट
ख़ुद
से
ही
रोएंगे
सुना
कर
लोरियाँ
सबको
सुलाता
है
अजल
की
गोद
में
हम-तुम
भी
सोएंगे
समुंदर
आँख
में
जिसके
हो
सिमटा
उसे
बारिश
ग़मों
के
क्या
भिगोएंगे
बिछड़ना
इश्क़
में
मरने
ही
जैसा
है
समझ
आएगी
जब
अपने
को
खोएंगे
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Vedic Dwivedi
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समुंदर
आँख
में
जिसके
हो
सिमटा
उसे
बारिश
ग़मों
की
क्या
भिगोएगी
Vedic Dwivedi
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सुब्ह
कहती
है
न
बैठो
हार
कर
तुम
था
बुरा
दिन
आज
कल
अच्छा
मिलेगा
Vedic Dwivedi
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यक़ीं
है
कि
हर
कोई
इज़्ज़त
करेगा
मगर
क्या
मुझी
सा
मुहब्बत
करेगा
चलेगा
नहीं
ज़ोर
हम
पे
किसी
का
बताए
वो
कैसे
हुकूमत
करेगा
पता
था
मुझे
बाद
रुख़सत
के
मेरे
मुझे
फिर
से
पाने
कि
मिन्नत
करेगा
कहेंगे
वही
जो
है
दिल
में
हमारे
हुआ
क्या
अगर
हम
से
नफ़रत
करेगा
करूँँं
गौ़र
क्यूँँं
उस
कि
ग़लती
पे
मैं
भी
अभी
है
वो
बच्चा
शरारत
करेगा
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Vedic Dwivedi
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तय
किया
जाए
कि
जाना
अब
कहाँ
है
लौटकर
हमको
भी
आना
अब
कहाँ
है
थी
मिला
करती
विदाई
लौटने
पर
वो
चलन
आख़िर
पुराना
अब
कहाँ
है
बोझ
कंधे
पर
उठा
घर
का
लिया
वो
घर
में
बेटे
का
ठिकाना
अब
कहाँ
है
रात
को
किस्से
नए
बाबा
सुनाते
खेत
में
लेकिन
मचाना
अब
कहाँ
है
एक
ही
था
कल
लुटा
आए
उसी
पर
हूँ
नहीं
तो
जाँ
लुटाना
अब
कहाँ
है
ये
मदद
तुम
लोगी
भी
तो
कैसे
लोगी
था
कभी
"दीपक"
दिवाना
अब
कहाँ
हैं
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Vedic Dwivedi
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