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Ved Rahi
shab ki taarikee badhti hi jaa.e
shab ki taarikee badhti hi jaa.e | शब की तारीकी बढ़ती ही जाए
- Ved Rahi
शब
की
तारीकी
बढ़ती
ही
जाए
कौन
आता
है
ज़ुल्फ़
बिखराए
झिलमिलाए
सितारों
के
झुरमुट
किस
की
पलकों
पे
अश्क
थर्राए
उस
की
जो
बात
है
निराली
है
दिल-ए-नादाँ
को
कौन
समझाए
उन
को
भूले
ज़माना
होता
है
अश्क
आँखों
में
फिर
भी
भर
आए
दम-ब-ख़ुद
सारी
काएनात
हुई
हम
ने
वो
गीत
प्यार
के
गाए
- Ved Rahi
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किसी
ने
प्यार
जताया
जता
के
छोड़
दिया
हवा
में
मुझको
उठाया
उठा
के
छोड़
दिया
किसे
सिखा
रहे
हो
इश्क़
तुम
नए
लड़के
ये
राग
हमने
मियाँ
गा
बजा
के
छोड़
दिया
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Vishnu virat
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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किसी
भी
शख़्स
के
झूठे
दिलासे
में
नहीं
आती
कहानी
हो
अगर
लंबी
तराशे
में
नहीं
आती
जहाँ
में
अब
कहाँ
कोई
जो
मजनूँ
की
तरह
चाहे
मोहब्बत
इसलिए
भी
अब
तमाशे
में
नहीं
आती
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Ansar Ethvi
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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बहुत
आसान
है
कहना,
बुरा
क्या
है
भला
क्या
है
करोगे
इश्क़
तब
मालूम
होगा,
मसअला
क्या
है
Bhaskar Shukla
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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कोई
तो
पूछे
मोहब्बत
के
इन
फ़रिश्तों
से
वफ़ा
का
शौक़
ये
बिस्तर
पे
क्यूँ
उतर
आया
Harsh saxena
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दिल
से
जब
लौ
लगी
नहीं
होती
आँख
भी
शबनमी
नहीं
होती
जिस
को
ग़म
ने
हयात
बख़्शी
हो
हर
ख़ुशी
वो
ख़ुशी
नहीं
होती
काँटे
जब
तक
जवाँ
नहीं
होते
शाख़
गुल
की
हरी
नहीं
होती
ख़ास
अंदाज़
जब
सुख़न
का
न
हो
शाएरी
शाएरी
नहीं
होती
लब
पे
जबरन
हँसी
भी
लाते
हैं
दर्द
में
कुछ
कमी
नहीं
होती
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Ved Rahi
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कुछ
नहीं
खुलता
इब्तिदा
क्या
है
इस
ख़राबात
की
बिना
क्या
है
सोचते
हैं
कि
इब्तिदा
क्या
थी
काश
समझें
कि
इंतिहा
क्या
है
नहीं
तुम
हो
हमारी
नज़रों
में
हम
नहीं
जानते
ख़ुदा
क्या
है
दर्द
तुम
ने
दिया
इनायत
की
मगर
इस
दर्द
की
दवा
क्या
है
हम
ने
दुनिया
में
क्या
नहीं
देखा
देखिए
और
देखना
क्या
है
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Ved Rahi
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उर्वशी
आसमाँ
से
आ
जाए
कोई
अर्जुन
सा
रूप
दिखलाए
कोई
बस
जाए
जो
तसव्वुर
में
मौत
भी
ज़िंदगी
से
शरमाए
चाँद
बिखरा
रहा
है
किरनों
को
कौन
आता
है
सर
को
निहुड़ाए
बादलों
के
सजीले
डोले
पर
कोई
दुल्हन
पिया
के
घर
जाए
कोई
फिर
दिल
में
चुटकियाँ
ले
ले
कोई
फिर
मन
को
आ
के
बहलाए
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Ved Rahi
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