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Vashu Pandey
do hi kaam the rote the pachtate the
do hi kaam the rote the pachtate the | दो ही काम थे रोते थे पछताते थे
- Vashu Pandey
दो
ही
काम
थे
रोते
थे
पछताते
थे
बस
ये
ही
कर
पाते
थे
पछताते
थे
अपनी
बढिया
कटती
थी
सहराओं
में
दिन
भर
ख़ाक़
उड़ाते
थे
पछताते
थे
पछताने
से
हासिल
क्या
होना
था
बस
अपना
ख़ून
जलाते
थे
पछताते
थे
- Vashu Pandey
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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तिरे
होंटों
की
सुर्ख़ी
देख
कर
तो
ऐसा
लगता
है
चबाया
हो
किसी
'आशिक़
का
दिल
हिंदा
मिज़ाजी
से
Meem Maroof Ashraf
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तुम्हें
हरगिज़
ग़लत
समझे
न
कोई
रुको
मैं
बे-वफ़ाई
कर
रहा
हूँ
Shadab Javed
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हमें
पढ़ाओ
न
रिश्तों
की
कोई
और
किताब
पढ़ी
है
बाप
के
चेहरे
की
झुर्रियाँ
हम
ने
Meraj Faizabadi
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मैं
ज़िंदगी
के
सभी
ग़म
भुलाए
बैठा
हूँ
तुम्हारे
इश्क़
से
कितनी
मुझे
सहूलत
है
Zeeshan Sahil
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रहबर
भी
ये
हमदम
भी
ये
ग़म-ख़्वार
हमारे
उस्ताद
ये
क़ौमों
के
हैं
में'मार
हमारे
Unknown
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मेरा
हर
दिन
तेरी
फ़ुर्क़त
में
बसर
होता
है
यार
होना
तो
नहीं
चाहिए,
पर
होता
है
Harman Dinesh
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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रुके
रुके
से
क़दम
रुक
के
बार
बार
चले
क़रार
दे
के
तिरे
दर
से
बे-क़रार
चले
Gulzar
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उसके
हाथ
में
बाक़ी
क्या
रह
जाता
है
तुमने
जिसका
हाथ
पकड़कर
छोड़
दिया
Vashu Pandey
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किसी
के
मरहले
का
हल
नहीं
है
तो
फिर
ये
क़ाएदे
का
हल
नहीं
है
यहाँ
उम्मीद
का
सूरज
उगाओ
दिया
इस
ताकचे
का
हल
नहीं
है
ये
लड़की
जान
है
साहब
हमारी
ये
लड़की
बिस्तरे
का
हल
नहीं
है
तो
क्या
हम
यूँॅं
ही
तड़पेंगे
मुसलसल
तो
क्या
इस
वसवसे
का
हल
नहीं
है
हमारा
एक
ही
तो
मसअला
है
हमारे
मसअले
का
हल
नहीं
है
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Vashu Pandey
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ये
लगभग
ग़ैर-मुमकिन
है
ख़ुदाया
पर
निकल
जाए
चराग़ों
के
दिमाग़ों
से
हवा
का
डर
निकल
जाए
इसी
डर
से
सफ़र
भर
में
कहीं
आँखें
नहीं
झपकी
कहीं
ऐसा
न
हो
ग़लती
से
तेरा
घर
निकल
जाए
तरीक़ा
एक
ही
है
बस
सुकूँ
पाने
का
दुनिया
में
यहाँ
से
दिल
निकल
जाए
यहाँ
से
सर
निकल
जाए
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Vashu Pandey
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वो
दर
बने
या
राह
की
दीवार
ख़ुश
रहे
मैं
बस
ये
चाहता
हूँ
मेरा
यार
ख़ुश
रहे
ऐसा
कोई
नहीं
कि
जिसे
कोई
ग़म
नहीं
ऐसा
कोई
नहीं
जो
लगातार
ख़ुश
रहे
मेहमान
रह
गया
है
ये
बस
चंद
रोज़
का
कोशिश
ये
कीजिएगा
कि
बीमार
ख़ुश
रहे
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Vashu Pandey
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दुखे
हुए
लोगों
की
दुखती
रग
को
छूना
ठीक
नहीं
वक़्त
नहीं
पूछा
करते
हैं
यारों
वक़्त
के
मारों
से
Vashu Pandey
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