kis qadar garaan thehri | किस क़दर गराँ ठहरी

  - Uzma Naqvi
किसक़दरगराँठहरी
मौसमोंकेसाहिलपर
आर-पारहोतीधुंद
आईनेकीक़ातिलहै
शाममेंनिकलतीधुंद
दिलज़रासाबोझलथा
उसपेआनठहरीहै
फिरसेयेइकहरीधुंद
आँखरौज़नोंपरहै
किसतरहउतारुंगी
वसवसोंकीफैलीधुंद
एकज़र्दबारिशमें
औरनींदलाएगी
ख़्वाबकीसुनहरीधुंद
  - Uzma Naqvi
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