jo waqif hai zamaane ke chalan se | जो वाक़िफ़ है ज़माने के चलन से

  - Ushba Tabeer
जोवाक़िफ़हैज़मानेकेचलनसे
वोबचजाएगादौर-ए-पुर-फ़ितनसे
उन्हींकीहैपस-ए-पर्दायेसाज़िश
बहुतमशहूरथेजोभोल-पनसे
सर-ए-बातिलझुकाहैऔरझुकेगा
रहेंगेहमहमेशाबाँकपनसे
जिसेतीर-ओ-तबरभीकरपाए
लियाहैकामहमनेवोसुख़नसे
जोफूलोंसेहमारीदोस्तीहै
कईकाँटेजुड़ेहैंपैरहनसे
लताफ़तदेखिएउर्दूज़बाँकी
किजैसेफूलझड़तेहोंदहनसे
तुम्हेंजबभीतख़य्युलमेंउतारा
नईख़ुशबूउठीहैफिरबदनसे
किसीकेवास्तेहमनेभी'उश्बा'
चुनेहैंफूलउल्फ़तकेचमनसे
  - Ushba Tabeer
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