har qadam par mujhe laghzish ka gumaan hota hai | हर क़दम पर मुझे लग़्ज़िश का गुमाँ होता है

  - Urooj Zaidi Badayuni
हरक़दमपरमुझेलग़्ज़िशकागुमाँहोताहै
चश्म-ए-साक़ीकीनवाज़िशकागुमाँहोताहै
येहिजाबात-ए-तअय्युनमुझेमंज़ूरनहीं
फ़िक्र-ए-आज़ादकोबंदिशकागुमाँहोताहै
लुत्फ़-ए-पैहमसहीजौर-ए-मुसलसलहीसही
हरतवज्जोहपेनवाज़िशकागुमाँहोताहै
उनकेआगेलब-ए-इज़हारपेहैमोहर-ए-सुकूत
एकख़ामोशपरस्तिशकागुमाँहोताहै
मैंक़फ़समेंहूँक़फ़सपेश-ए-निगाह-ए-सय्याद
पर-ए-पर्वाज़मेंजुम्बिशकागुमाँहोताहै
सिर्फ़तुमदिलकीतबाहीकासबबक्याहोते
बख़्त-ए-ना-साज़कीसाज़िशकागुमाँहोताहै
बातयेक्याहै'उरूज'इनकीहरइकबातमेंआज
अपनीहरतर्ज़-ए-गुज़ारिशकागुमाँहोताहै
  - Urooj Zaidi Badayuni
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