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Upendra Bajpai
bahut mushkil hai dard-e-dil sambhaala ja nahin saka
bahut mushkil hai dard-e-dil sambhaala ja nahin saka | बहुत मुश्किल है दर्द-ए-दिल सँभाला जा नहीं सकता
- Upendra Bajpai
बहुत
मुश्किल
है
दर्द-ए-दिल
सँभाला
जा
नहीं
सकता
तुम्हारी
याद
का
काँटा
निकाला
जा
नहीं
सकता
तुम्हें
पाने
की
दिल
में
छटपटाहट
है
बहुत
लेकिन
ख़ुदा
ने
जो
लिखा
क़िस्मत
में
टाला
जा
नहीं
सकता
- Upendra Bajpai
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कैसे
किसी
की
याद
हमें
ज़िंदा
रखती
है
एक
ख़याल
सहारा
कैसे
हो
सकता
है
Jawwad Sheikh
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नहीं
आती
तो
याद
उनकी
महीनों
तक
नहीं
आती
मगर
जब
याद
आते
हैं
तो
अक्सर
याद
आते
हैं
Hasrat Mohani
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ज़रा
सी
देर
आँखों
में
चली
जाए
तुम्हारी
याद
बहुत
दिन
हो
गए
दिल
का
मुझे
झाड़ू
लगाना
है
Tanoj Dadhich
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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जाते
जाते
आप
इतना
काम
तो
कीजे
मिरा
याद
का
सारा
सर-ओ-सामाँ
जलाते
जाइए
Jaun Elia
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मैं
रहा
उम्र
भर
जुदा
ख़ुद
से
याद
मैं
ख़ुद
को
उम्र
भर
आया
Jaun Elia
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वर्षों
की
सब
याद
सजा
के
रक्खी
है
घर
में
बस
सामान
नहीं
है,
समझा
कर
Shivam Tiwari
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यहाँ
पे
कल
की
रात
सर्द
थी
हर
एक
रोज़
से
सो
रात
भर
बुझा
नहीं
तुम्हारी
याद
का
अलाव
Siddharth Saaz
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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मौत
के
बाद
का
मंज़र
न
बयाँ
हो
जैसे
ऐसे
मुश्किल
है
ज़माने
से
तेरा
दुख
कहना
Upendra Bajpai
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उसकी
आँखें
नहीं
बनाउँगा
वरना
काग़ज़
पे
डूब
जाउँगा
Upendra Bajpai
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एक
मुद्दत
से
गुमशुदा
हूँ
मैं
तुमको
मिल
जाऊँ
तो
ख़बर
करना
Upendra Bajpai
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रात
के
वक़्त
मुझे
हुस्न-ए-उदासी
न
दिखा
रात
के
वक़्त
मेरे
ज़ख़्म
जवाँ
होते
हैं
Upendra Bajpai
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सोलह
दिन
पहले
तक
जो
बस
मेरी
थी
सोलह
दिन
के
बाद
वही
'तौबा-तौबा'
Upendra Bajpai
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