har ik ka dard usii aashufta-sar men tanhaa tha | हर इक का दर्द उसी आशुफ़्ता-सर में तन्हा था

  - Umar Ansari
हरइककादर्दउसीआशुफ़्ता-सरमेंतन्हाथा
वोएकशख़्सजोसारेनगरमेंतन्हाथा
वोआदमीभीजिसेजान-ए-अंजुमनकहिए
चलाजबउठकेतोसारेसफ़रमेंतन्हाथा
जोतीरआयागलेमिलकेदिलसेलौटगया
वोअपनेफ़नमेंमैंअपनेहुनरमेंतन्हाथा
उसइकदिएसेहुएकिसक़दरदिएरौशन
वोइकदियाजोकभीबाम-ओ-दरमेंतन्हाथा
सुनाहैलुटगयाकलरातरास्तेमेंकहीं
जोएकरह-गुज़रीरहगुज़रमेंतन्हाथा
उठायेशोरवहींसेसदाओंकाक्यूँँ-कर
वोआदमीतोसुनाअपनेघरमेंतन्हाथा
हरइकमेंकोईकमीथीहरइकमेंथाकोईऐब
धुलाहुआवहीबसआब-ए-ज़रमेंतन्हाथा
पासकाकभीता-उम्रलुत्फ़-ए-तन्हाई
उमरजोसारेजहाँकीनज़रमेंतन्हाथा
  - Umar Ansari
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