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Priya Dixit
raushni ghar kii zaroori hai magar
raushni ghar kii zaroori hai magar | रौशनी घर की ज़रूरी है मगर
- Priya Dixit
रौशनी
घर
की
ज़रूरी
है
मगर
दिल
को
भी
थोड़ी
तवक़्क़ो
चाहिए
- Priya Dixit
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तो
देख
लेना
हमारे
बच्चों
के
बाल
जल्दी
सफ़ेद
होंगे
हमारी
छोड़ी
हुई
उदासी
से
सात
नस्लें
उदास
होंगी
Danish Naqvi
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ज़मीन-ओ-आसमाँ
को
जगमगा
दो
रौशनी
से
दिसम्बर
आज
मिलने
जा
रहा
है
जनवरी
से
Bhaskar Shukla
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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तिरे
बग़ैर
अजब
बज़्म-ए-दिल
का
आलम
है
चराग़
सैंकड़ों
जलते
हैं
रौशनी
कम
है
Shakeel Badayuni
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है
किसी
जालिम
उदू
की
घात
दरवाज़े
में
है
या
मसाफ़त
है
नई
या
रात
दरवाज़े
में
है
जिस
तरहा
उठती
है
नजरें
बे-इरादा
बार-बार
साफ़
लगता
है
के
कोई
बात
दरवाजे
में
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Farhat Abbas Shah
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इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
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शहसवारों
ने
रौशनी
माँगी
मैं
ने
बैसाखियाँ
जला
डालीं
Fahmi Badayuni
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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हल्की-हल्की
सी
हँसी,
साफ
इशारा
भी
नहीं
जान
भी
ले
गए
और,
जान
से
मारा
भी
नहीं
Sawan Shukla
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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मैं
वाक़िफ़
जुदा
रास्तों
से
नहीं
थी
ये
ज़िद
साथ
चलने
की
वरना
न
करती
Priya Dixit
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रहूँगा
मुन्तज़िर
कैलाश
पर
धूनी
रमाये
मैं
ये
तुम
सेे
इश्क़
कोई
इक
जनम
का
साथ
थोड़ी
है
Priya Dixit
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बाल
,किताबें
,कमरे
ये
सब
बिखरे
ही
अच्छे
लगते
हैं
हर
अच्छी
लड़की
को
लड़के
बिगड़े
ही
अच्छे
लगते
हैं
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Priya Dixit
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मुझ
सेे
पहले
कोई
रंग
लगाए
उनको
कैसे
सह
लें
यार
भला
ये
होली
में
हम
Priya Dixit
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फूल
के
तोड़े
जाने
से
भी
डरती
थी
जिसका
तुमने
दिल
तोड़ा
है
वो
लड़की
Priya Dixit
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