khizaan ka waqt hai ye mausam-e-bahaar nahin | ख़िज़ाँ का वक़्त है ये मौसम-ए-बहार नहीं

  - Haider Khan
ख़िज़ाँकावक़्तहैयेमौसम-ए-बहारनहीं
अबभीजाओकेइसदिलकोअबक़रारनहीं
नज़रमिलाकेयहीबातमुझसेेफिरसेकहो
कितुमकोमेरीमोहब्बतकाए'तिबारनहीं
अभीभीइसकेसहारेगुज़ारसकतेहैं
येदिलशिकस्तातोहैपरयेसोगवारनहीं
ज़मींसेवुसअत-ए-आफ़ाक़तकहमारेसिवा
सभीतुम्हारेयाँतालिबहैंग़म-गुसारनहीं
चराग़लेकेअभीभीखड़ेहोराहोंमें
औरउसकेबादभीकहतेहोइंतिज़ारनहीं
ख़ताथीउसकीपरइल्ज़ाममेरेसरहीरहा
वोशख़्सदेखोज़रासाभीशर्म-सारनहीं
उसेतोहिज्रकेग़मसेभीमिलगईहैनजात
वोमेरेदर्जेकाशायदगुनाहगारनहीं
  - Haider Khan
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