ye ek baat samajhne men raat ho gaii hai | ये एक बात समझने में रात हो गई है

  - Tehzeeb Hafi
येएकबातसमझनेमेंरातहोगईहै
मैंउससेजीतगयाहूँकिमातहोगईहै
मैंअबकेसालपरिंदोंकादिनमनाऊँगा
मिरीक़रीबकेजंगलसेबातहोगईहै
बिछड़केतुझसेख़ुशरहसकूंगासोचाथा
तिरीजुदाईहीवजह-ए-नशातहोगईहै
बदनमेंएकतरफ़दिनजुलूअमैंनेकिया
बदनकेदूसरेहिस्सेमेंरातहोगईहै
मैंजंगलोंकीतरफ़चलपडाहूँछोड़केघर
येक्याकिघरकीउदासीभीसाथहोगईहै
रहेगायादमदीनेसेवापसीकासफ़र
मैंनज़्मलिखनेलगाथाकिनातहोगईहै
  - Tehzeeb Hafi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy