kitnii raatein kaat chuka hooñ par vo vasl ka din | कितनी रातें काट चुका हूँ पर वो वस्ल का दिन

  - Tehzeeb Hafi
कितनीरातेंकाटचुकाहूँपरवोवस्लकादिन
इसदरियासेपहलेकितनेजंगलआतेहैं
हमेंतोनींदभीआतीहैतोआधीआतीहै
वोकैसेहैंजिनकोख़्वाबमुकम्मलआतेहैं
इसरस्तेपरपेड़भीआतेहैंउसनेपूछा
जलकरख़ुशबूदेनेवालेसंदलआतेहैं
कौनहैजोइसदिलमेंख़ामोशीसेउतरेगा
देखोइसआवाज़पेकितनेपागलआतेहैं
इकसेभड़करएकसवारीअस्प-औ-फीलभीहै
जानेक्यूँहमतेरीज़ानिबपैदलआतेहैं
  - Tehzeeb Hafi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy