na neend aur na KHvaabon se aankh bharni hai | न नींद और न ख़्वाबों से आँख भरनी है

  - Tahzeeb Hafi
नींदऔरख़्वाबोंसेआँखभरनीहै
किउससेहमनेतुझेदेखनेकीकरनीहै
किसीदरख़्तकीहिद्दतमेंदिनगुज़ारनाहै
किसीचराग़कीछाँवमेंरातकरनीहै
वोफूलऔरकिसीशाख़परनहींखुलना
वोज़ुल्फ़सिर्फ़मिरेहाथसेसँवरनीहै
तमामनाख़ुदासाहिलसेदूरहोजाएँ
समुंदरोंसेअकेलेमेंबातकरनीहै
हमारेगाँवकाहरफूलमरनेवालाहै
अबउसगलीसेवोख़ुश्बूनहींगुज़रनीहै
तिरेज़ियाँपेमैंअपनाज़ियाँकरबैठूँ
किमुझमुरीदकामुर्शिद'उवैस-क़रनी'है
  - Tahzeeb Hafi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy