main us ki mohabbat se ik din bhi mukar jaata | मैं उस की मोहब्बत से इक दिन भी मुकर जाता

  - Tahir Azeem
मैंउसकीमोहब्बतसेइकदिनभीमुकरजाता
कुछऔरनहींहोताइसदिलसेउतरजाता
जिसशामगिरफ़्तारीक़िस्मतमेंमिरीआई
उसशामकीलज़्ज़तसेमैंऔरबिखरजाता
ख़ुशबूकेतआक़ुबनेज़ंजीरकियामुझको
वर्नातोयहाँसेमैंचुप-चापगुज़रजाता
आवाज़समाअततकपहुँचीहीनहींशायद
वोवर्नातसल्लीकोकुछदेरठहरजाता
ज़ेहनोंकेमरासिमथेइकसाथभीहोजाते
इकराहअगरकोईदीवारमेंकरजाता
तासीरनहींरहतीअल्फ़ाज़कीबंदिशमें
मैंसचजोनहींकहतालहजेकाअसरजाता
अबतेरेबिछड़नेसेयेबातखुलीमुझपर
तोजानअगरहोतामैंजाँसेगुज़रजाता
दिलहमने'अज़ीम'अपनाआसेब-ज़दारक्खा
जोख़्वाबजन्मलेतावोख़ौफ़सेमरजाता
  - Tahir Azeem
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