ik vehshat si dar aayi hai aankhoñ men | इक वहशत सी दर आई है आँखों में

  - Tahir Azeem
इकवहशतसीदरआईहैआँखोंमें
अपनीसूरतधुँदलाईहैआँखोंमें
आजचमनकाहालपूछोहम-नफ़सो
आजख़िज़ाँकीरुतआईहैआँखोंमें
बरसोंपहलेजिसदरियामेंउतराथा
अबतकउसकीगहराईहैआँखोंमें
इनबातोंपरमतजानाजोआमहुईं
देखोकितनीसच्चाईहैआँखोंमें
इनमेंअबभीहर्फ़-ए-मोहब्बतबस्ताहै
इसीलिएतोगहराईहैआँखोंमें
हाथपकड़करजिसकाचलनासीखाहै
उसकेनामकीबीनाईहैआँखोंमें
धूप'अज़ीम'अबफैलीहैजोशिद्दतसे
तोसाएकीरा'नाईहैआँखोंमें
  - Tahir Azeem
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