rivaaj-o-rasm na ghar-baar ke musaafir hain | रिवाज-ओ-रस्म न घर-बार के मुसाफ़िर हैं

  - Tahir Adeem
रिवाज-ओ-रस्मघर-बारकेमुसाफ़िरहैं
हमऔरलोगहैंउसपारकेमुसाफ़िरहैं
सफ़रक़दीमसेदरपेशकौनसाहैहमें
जानेकौनसीदीवारकेमुसाफ़िरहैं
मंज़िलोंकातअ'य्युनरास्तोंकीख़बर
हमऐसेलोगतोबे-कारकेमुसाफ़िरहैं
सरमेंडरहैकहींकाख़ौफ़-ए-जौर-ओ-सितम
अज़ाबरासहैंआज़ारकेमुसाफ़िरहैं
हैंफ़र्श-ए-राहबलाएँतोहम-क़दमआसेब
किसीजहानपरअसरारकेमुसाफ़िरहैं
मिलेअगरतोभरेख़ुशबुएँख़यालोंमें
किदस्त-ए-यार-ए-तरह-दारकेमुसाफ़िरहैं
बिना-ए-रख़्तबिना-ए-सफ़रतवक्कुलहै
मदददस्त-ए-मदद-गारकेमुसाफ़िरहैं
शुमार-ए-मौज़ूअ'-ए-फ़ितरतमेंसरखपातेहैं
सरोंमेंदौड़तेअफ़्कारकेमुसाफ़िरहैं
वोदोस्तीहोअदावतहोकुछभीहो'ताहिर'
हरएकचीज़मेंमेआ'रकेमुसाफ़िरहैं
  - Tahir Adeem
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