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Sultan
yuñ to guzre hain bahut ahle muhabbat lekin
yuñ to guzre hain bahut ahle muhabbat lekin | यूँँ तो गुज़रे हैं बहुत अहले मुहब्बत लेकिन
- Sultan
यूँँ
तो
गुज़रे
हैं
बहुत
अहले
मुहब्बत
लेकिन
हम
से
आशुफ्ता
सर्
इस
शहरस
कम
गुज़रे
हैं
- Sultan
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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जो
सुनते
हैं
कि
तिरे
शहर
में
दसहरा
है
हम
अपने
घर
में
दिवाली
सजाने
लगते
हैं
Jamuna Parsad Rahi
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
Bhaskar Shukla
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सुना
है
लोग
उसे
आँख
भर
के
देखते
हैं
सो
उस
के
शहर
में
कुछ
दिन
ठहर
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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तुम
मुहब्बत
से
नहीं
मुझ
सेे
ख़फ़ा
हो
शायद
तुम
अगर
चाहो
तो
पिंजरा
भी
बदल
सकते
हो
मुंतज़िर
हूँ
मैं
सो
नंबर
भी
नहीं
बदलूँगा
और
तुम
शहर
का
नक़्शा
भी
बदल
सकते
हो
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Vikram Sharma
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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उसकी
बस्ती
से
पहले
कब्रिस्तान
आशिकों
के
लिए
इशारा
था
Unknown
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नींद
तो
दर्द
के
बिस्तर
पे
भी
आ
सकती
है
उनकी
आग़ोश
में
सर्
हो
ये
ज़रूरी
तो
नहीं
Sultan
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आ
जा
के
बेकरारियाँ
हद
से
गुज़र
गई
अब
ज़ख़्म
इंतेज़ार
का
नासूर
हो
गया
Sultan
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तुम
सेे
मिले
ना
थे
तो
कोई
आरज़ू
ना
थी
देखा
तुझे
तो
तेरे
तलबगार
हो
गए
Sultan
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भूल
जाने
का
तुझे
कैसे
तसव्वुर
कर
लूँ
मेरे
हर
ख़्वाब
की
रुठी
हुई
ता'बीर
है
तू
Sultan
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मायूसियों
के
दौर
में
किन
हसरतों
के
साथ
हम
पत्थरों
के
दिल
में
ख़ुदा
ढूंढते
रहे
Sultan
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